रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब पुतिन किसी ब्रिक्स समिट के लिए रूस से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आमने-सामने की मुलाकात इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण है।
इस दौरे का मुख्य केंद्र रक्षा तकनीक है। चर्चा है कि रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 की तकनीक भारत के साथ साझा करने और इसे मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाने का प्रस्ताव दे सकता है। भारत की रुचि केवल विमान खरीदने में नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक हासिल करने में है जिससे भविष्य में स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को मजबूती मिले।
इसके अलावा, ब्रह्मोस-NG (अगली पीढ़ी की हल्की मिसाइल) पर काम तेज करने पर भी सहमति बन सकती है, जिसे भविष्य में तेजस जैसे विमानों से दागा जा सकेगा। S-400 मिसाइल सिस्टम की शेष खेप और सुपर सुखोई प्रोजेक्ट के तहत Su-30MKI विमानों को आधुनिक रडार से लैस करना भी प्राथमिकताओं में शामिल है।
रक्षा के बाद दूसरा बड़ा फोकस एनर्जी सेक्टर है। कुडनकुलम परमाणु प्लांट के बाद, अब रूस और भारत छोटे आकार के न्यूक्लियर रिएक्टर्स (SMRs) पर साझेदारी की योजना बना रहे हैं। ये रिएक्टर्स न केवल कम जगह घेरते हैं, बल्कि पारंपरिक प्लांट्स की तुलना में अधिक सुरक्षित और कम समय में तैयार होने वाले होते हैं।
भारत और रूस व्यापारिक लेनदेन को डॉलर आधारित अर्थव्यवस्था से हटाकर अपनी स्थानीय मुद्राओं में करने पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश इस बात की संभावना तलाश रहे हैं कि कैसे रुपये-रूबल में व्यापार को और अधिक सरल बनाया जाए। इसका उद्देश्य वैश्विक अस्थिरता के बीच आर्थिक निर्भरता को कम करना है।
सामान की आवाजाही को गति देने के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग पर बातचीत तेज होगी। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक रूट सक्रिय होने से माल ढुलाई का समय 40 दिन से घटकर 20-22 दिन रह जाने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य है। उनके साथ उनका फ्लाइंग क्रेमलिन (IL-96-300PU) विमान और उनकी विशेष बख्तरबंद कार ऑरस सीनेट लिमोजिन भी पहुंची है। उनकी सुरक्षा का जिम्मा रूसी एजेंसी FSO और भारतीय सुरक्षा बल मिलकर संभाल रहे हैं।
यह मुलाकात मात्र कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि Su-57 से लेकर ट्रेड कॉरिडोर तक के ये फैसले आने वाले दशकों में भारत और रूस के सामरिक और आर्थिक संबंधों की नई दिशा तय करने वाले हैं।
🇷🇺🇮🇳Ceremony marking the official arrival of Russian President Vladimir #Putin in #India to attend the#BRICS Summit. pic.twitter.com/yemWZUGi8Q
— Russia in India 🇷🇺 (@RusEmbIndia) September 10, 2026
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