पुतिन का दिल्ली में ग्रैंड वेलकम: यूक्रेन जंग के बाद पहली भारत यात्रा, मोदी के साथ तय होगी नई वैश्विक बिसात
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नई दिल्ली: ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। राजधानी दिल्ली मेहमानों के स्वागत के लिए सज चुकी है, और इसी बीच एक बड़ी खबर आई है—रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँच चुके हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा है, जो भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

पालम एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत रूसी राष्ट्रपति का विमान शुक्रवार तड़के दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा। पुतिन के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने उनका औपचारिक स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर इस यात्रा का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया।

शाम को मोदी-पुतिन की अहम बैठक शुक्रवार शाम का समय कूटनीतिक रूप से सबसे व्यस्त रहने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा होगी। शाम को ही ब्रिक्स बिजनेस फोरम में दोनों नेता एक साझा मंच पर भी दिखाई देंगे।

दिग्गज नेताओं का जुटान ब्रिक्स समिट के लिए आज दुनिया भर के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा दिल्ली में होगा। पुतिन के अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी सहित कई बड़े वैश्विक नेता हिस्सा ले रहे हैं।

युद्ध के बाद पहली व्यक्तिगत उपस्थिति फरवरी 2022 में यूक्रेन संकट शुरू होने के बाद से यह पुतिन की किसी भी ब्रिक्स समिट में पहली व्यक्तिगत भागीदारी है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संकट और बदलती व्यापारिक नीतियों के दबाव में है, दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है।

क्या है ब्रिक्स 2026 का एजेंडा? 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को मजबूत करने पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। जानकारों का मानना है कि भारत इस मंच का उपयोग एक पुल के रूप में कर रहा है, ताकि बिखरे हुए वैश्विक परिदृश्य में ब्रिक्स को एक प्रभावी और संतुलित आधार प्रदान किया जा सके।

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