दिल्ली ब्रिक्स समिट: पुतिन की डील और जिनपिंग का गिफ्ट , भारत बना वैश्विक कूटनीति का केंद्र
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नई दिल्ली: भारत इस समय दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक हलचल का केंद्र बना हुआ है। दिल्ली में होने जा रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए अंतरराष्ट्रीय नेताओं का आगमन शुरू हो गया है। इस समिट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी सबसे अधिक चर्चा में है।

पुतिन और मोदी की अहम बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समिट के दौरान 12 देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। शुक्रवार को पीएम मोदी और पुतिन के बीच अहम चर्चा होगी, जिसमें रक्षा क्षेत्र में ज्वाइंट प्रोडक्शन पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच 105 टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट की डील पहले ही चर्चा में है। इसके अलावा सुखोई फाइटर जेट्स के इंजन तकनीक साझा करने और एस-400 डिफेंस सिस्टम जैसे मुद्दों पर गंभीर मंथन हो सकता है।

7 साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की पुष्टि ने सस्पेंस खत्म कर दिया है। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी के बीच यह दौरा बेहद अहम है। जिनपिंग अपने साथ 400 सदस्यों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल ला रहे हैं, जिसमें ट्रेड और आर्थिक रणनीतिकार शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में रेयर अर्थ मटेरियल की सप्लाई और ट्रेड इम्बैलेंस को कम करने पर बातचीत हो सकती है। चीन फिलहाल ट्रंप के टैरिफ वॉर से निपटने के लिए भारत के साथ आर्थिक सहयोग का रास्ता तलाश रहा है।

भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर जेफरीज की एक हालिया रिपोर्ट India s New Industrial Revolution ने वैश्विक स्तर पर भारत का कद बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस—ये 6 क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के नए इंजन बनने जा रहे हैं। अगले 10 वर्षों में इन क्षेत्रों में भारी निवेश की संभावना है, जिससे भारत की आर्थिक विकास दर को नई गति मिलेगी।

विपक्ष के सवालों पर क्या कहते हैं आंकड़े? ब्रिक्स समिट को लेकर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम जैसे विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि ब्रिक्स और अन्य वैश्विक मंचों से भारत को क्या लाभ हुआ? हालांकि, आधिकारिक आंकड़े विपरीत तस्वीर पेश करते हैं। 2015 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार 102 बिलियन डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 416 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। साथ ही, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के जरिए भारत ने अब तक 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक के 32 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दिलवाई है।

वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी कंपनियों के प्रमुख भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। इनमें चीन के सरकारी बैंकों के चेयरमैन, हुआवे, अलीबाबा, एमिरेट्स एअरलाइन, रशिया रेलवे और एसबर बैंक जैसे संस्थानों के आला अधिकारी शामिल हैं। यह समिट न केवल भारत की कूटनीतिक जीत है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निवेश का एक बड़ा द्वार भी साबित होने जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑल सेट फॉर ब्रिक्स का संदेश देकर साफ कर दिया है कि अगले कुछ दिन दिल्ली दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था के नए विमर्श को तय करेगी।

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