ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: विदेशी मेहमानों के शाही ठाठ-बाट का खर्च आखिर कौन उठाता है?
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दिल्ली में होने जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तैयारी हो चुकी है। पुतिन से लेकर शी जिनपिंग तक, दुनिया के सबसे ताकतवर नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं। इन मेहमानों के लिए शहर के सबसे महंगे होटलों में सुइट बुक किए गए हैं। ऐसे में यह सवाल चर्चा में है कि इन वीवीआईपी और उनके साथ आने वाले सैकड़ों लोगों की खातिरदारी का बिल कौन भरता है?

मेजबान देश का होता है मुख्य वित्तीय भार अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परंपरा के अनुसार, जिस देश में शिखर सम्मेलन होता है, वही इसका मुख्य मेजबान माना जाता है। भारत सरकार का विदेश मंत्रालय इस पूरे आयोजन का बजट वहन करता है। इसमें वेन्यू प्रबंधन, विदेशी नेताओं का स्वागत और लॉजिस्टिक्स का खर्च शामिल है। सुरक्षा की बहुस्तरीय जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के पास है।

मेजबान देश को क्या-क्या उठाना पड़ता है खर्च? प्रोटोकॉल के तहत, मुख्य राष्ट्राध्यक्ष और उनके कुछ चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों के फाइव-स्टार होटल के सुइट्स और भोजन का बिल मेजबान देश ही चुकाता है। इसके अलावा, विदेशी नेताओं के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ियां, सुरक्षा काफिला, एयरपोर्ट पर विमानों की पार्किंग और आधिकारिक रात्रिभोज (Official Banquet) का खर्च पूरी तरह मेजबान (भारत) का होता है।

अतिथि देश खुद क्या उठाता है खर्च? विदेशी नेताओं के साथ आने वाले सैकड़ों लोगों का लश्कर मेजबान देश के लिए मुसीबत नहीं, बल्कि अतिथि देश की अपनी जिम्मेदारी होती है। वीवीआईपी के अलावा आने वाले जूनियर अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और मीडिया टीम के होटल खर्च का भुगतान संबंधित देश खुद करता है।

निजी जरूरतों पर भी खर्च करता है अतिथि देश इतना ही नहीं, यदि कोई देश अपनी सुरक्षा के लिए अपने निजी बख्तरबंद वाहन, खास शेफ या विशेष संचार उपकरण साथ लाता है, तो उनके लाने-ले जाने और रखरखाव का पूरा खर्च उसी देश की जेब से जाता है। इसके अलावा, विदेशी विमानों के ईंधन और आवाजाही का खर्च भी संबंधित देश ही उठाता है।

संक्षेप में कहें तो, मेजबान देश केवल वीवीआईपी और मुख्य समारोह के बुनियादी शाही इंतजामों का जिम्मा उठाता है, जबकि बाकी भारी-भरकम दल और निजी जरूरतों का बोझ संबंधित अतिथि देश को खुद ही उठाना पड़ता है।

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