चमत्कार या संयोग? उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में लंगूरों का जमावड़ा, उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
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उज्जैन: सती गेट स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मंदिर को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से ही यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। इसी बीच, मंदिर परिसर में अचानक लंगूरों के एक बड़े झुंड के पहुंचने ने लोगों की उत्सुकता और आस्था को और बढ़ा दिया है।

अचानक पहुंचे लंगूर, चर्चाओं का बाजार गर्म मंदिर परिसर में अचानक बड़ी संख्या में लंगूरों के आने का कोई ठोस कारण स्पष्ट नहीं है। हालांकि, हनुमान जी के मंदिर में लंगूरों की मौजूदगी को श्रद्धालु किसी दैवीय संकेत के रूप में देख रहे हैं। मंदिर आने वाले दर्शनार्थी अब हनुमान जी के साथ-साथ इन लंगूरों को भी बड़े आश्चर्य और भक्ति भाव से देख रहे हैं। प्रशासन ने इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

सोशल मीडिया का असर: 4 दिनों में 8 हजार श्रद्धालु सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे खड़े हनुमान प्रतिमा के वीडियो ने पूरे देश में हलचल पैदा कर दी है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि प्रतिमा चमत्कारिक रूप से अपनी जगह पर अडिग है। इस चर्चा का असर यह हुआ कि पिछले चार दिनों में मध्य प्रदेश सहित गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से 8 हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। लोग मंदिर की रील बनाकर सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं, जिससे भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।

बैरिकेडिंग और टेंट में हनुमान जी मंदिर के आसपास का अधिकांश हिस्सा तोड़ा जा चुका है, लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा फिलहाल एक टेंट में विराजमान है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मंदिर के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी है और भारी पुलिस बल तैनात किया है। किसी बड़े त्योहार के न होने के बावजूद, सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। ताबीज और झड़नी से जुड़ी मान्यताओं को भी इस भीड़ का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं की दो-टूक: आस्था पर न हो चोट मंदिर हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोगों और बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी है। मंदिर चौपाल पर एकत्रित लोगों का कहना है कि जब भगवान अपनी जगह नहीं छोड़ रहे, तो प्रशासन को भी जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

श्रद्धालुओं का तर्क है कि शहर के विकास के नाम पर अब तक 60 से ज्यादा मंदिर हटाए जा चुके हैं, लेकिन इस मंदिर के साथ लाखों लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि विकास कार्यों को करते समय धार्मिक आस्थाओं के प्रति संवेदनशीलता बरती जाए और मंदिर को यथावत रहने दिया जाए।

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