पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शामली जिला हमेशा से प्रदेश की राजनीति का पावर सेंटर रहा है। कैराना से लेकर शामली तक का सियासी गणित लखनऊ की सत्ता का रास्ता तय करने में अहम भूमिका निभाता है। 2027 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, जिले का राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है।
शामली: एक परिचय 2011 में मुजफ्फरनगर से अलग होकर बने शामली जिले की कुल आबादी करीब 12.74 लाख है। यहां का सामाजिक ताना-बाना बेहद दिलचस्प है, जहां लगभग 67 प्रतिशत हिंदू और 32 प्रतिशत मुस्लिम आबादी निवास करती है। जिले की तीनों विधानसभा सीटें—कैराना, थाना भवन और शामली—सामान्य श्रेणी में आती हैं।
2022 का चुनावी परिणाम पिछले विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदली हुई थी। सपा-रालोद गठबंधन ने जिले की तीनों सीटों पर अपना कब्जा जमाया था। कैराना से नाहिद हसन, थाना भवन से रालोद के अशरफ अली खान और शामली सीट से रालोद के प्रसन्न चौधरी ने जीत दर्ज कर भाजपा के प्रभाव को चुनौती दी थी।
कैराना: हसन परिवार बनाम भाजपा का इतिहास कैराना सीट का इतिहास हसन परिवार और स्वर्गीय हुकुम सिंह के बीच की अदावत के इर्द-गिर्द घूमता है। 1991 में चौधरी मुनव्वर हसन की जीत से शुरू हुआ यह सफर आज नाहिद हसन तक पहुंच चुका है। पलायन के मुद्दों से लेकर लोकसभा उपचुनाव तक, यह सीट हमेशा से राज्य के सबसे चर्चित चुनावी क्षेत्रों में से एक रही है।
2027 का बदलता समीकरण: दोस्त बने दुश्मन 2027 के चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव गठबंधन के स्वरूप में आया है। 2022 में भाजपा को हराने वाली राष्ट्रीय लोक दल (RLD) अब एनडीए का हिस्सा है। केंद्र में गठबंधन और जयंत चौधरी के मंत्री बनने के बाद, अब मुकाबला भाजपा-रालोद बनाम सपा का होगा।
इस नए गठबंधन के तहत, थाना भवन और शामली सीट पर रालोद अपना दावा मजबूत कर रही है, जबकि कैराना में नाहिद हसन की पकड़ के चलते सपा इसे अपनी सबसे सुरक्षित सीट मान रही है।
जातीय समीकरण का प्रभाव
निष्कर्ष 2027 का चुनाव शामली के लिए पुरानी प्रतिद्वंद्विता और नई दोस्ती की परीक्षा होगा। जहां सपा अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं भाजपा-रालोद का डबल इंजन गठबंधन इस क्षेत्र में अपनी खोई हुई साख को फिर से हासिल करने की कोशिश में है।
Q. शामली जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं? A. कुल 3 सीटें (कैराना, थाना भवन और शामली)।
Q. क्या जिले में कोई सीट आरक्षित है? A. नहीं, तीनों सीटें सामान्य श्रेणी (General) में हैं।
Q. 2022 में किसका दबदबा रहा था? A. सपा-रालोद गठबंधन ने जिले की तीनों सीटें अपने नाम की थीं।
Q. 2027 में मुख्य मुकाबला किनके बीच है? A. मुख्य मुकाबला भाजपा-रालोद गठबंधन बनाम समाजवादी पार्टी के बीच होने की प्रबल संभावना है।
*1980 की बदहाल तस्वीर, 2026 की बुलंद तक़दीर।#BJP4UP #BJP4ViksitBharat #नवनिर्माण_के_नौ_वर्ष pic.twitter.com/aah4M7AfPt
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) September 10, 2026
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