किसी की फेक फोटो वायरल की तो खैर नहीं: जेल और भारी जुर्माने का क्या है प्रावधान?
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सोशल मीडिया पर दूसरों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करना या डीपफेक का इस्तेमाल करना आजकल एक गंभीर अपराध बन चुका है। लोग अक्सर इसे मामूली मजाक समझकर अंजाम देते हैं, लेकिन कानून इसे सीधा क्राइम मानता है। हाल ही में भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया से जुड़े मामले ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल दुनिया में किसी की छवि खराब करना कितना महंगा पड़ सकता है।

क्या है कानून का रुख?

किसी की सहमति के बिना उसकी फोटो को मॉर्फ (बदलना) करना या उसे सार्वजनिक करना निजता का उल्लंघन और पहचान की चोरी (Identity Theft) माना जाता है। यदि इरादा किसी को बदनाम करना है, तो यह मानहानि की श्रेणी में भी आता है। आईटी एक्ट के तहत ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान हैं।

कौन सी धाराएं हो सकती हैं लागू?

फेक फोटो के इस्तेमाल पर कानून का डंडा इन धाराओं के तहत चलता है:

कितनी हो सकती है सजा और जुर्माना?

कानूनी जानकारों के मुताबिक, पहचान चुराने और निजता भंग करने के मामलों में 3 साल तक की जेल और 1 से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यदि फोटो अश्लील है, तो पहली बार पकड़े जाने पर 3 साल की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार ऐसा करने पर सजा 5 साल और जुर्माना 10 लाख रुपये तक बढ़ सकता है। मानहानि का केस अलग से चलता है, जिसमें आर्थिक हर्जाना भी देना पड़ सकता है।

गौरव भाटिया केस: एक बड़ी सीख

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया के खिलाफ एआई-जनित (AI-generated) फर्जी ग्राफिक शेयर किया गया था, जिसमें उनके नाम से आपत्तिजनक बातें जोड़ी गई थीं। भाटिया ने बिना माफी के मामले को कोर्ट तक पहुँचाया। दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित लोगों को पोस्ट हटाने का आदेश दिया गया है। यह मामला चेतावनी है कि डिजिटल शरारत अब कोर्ट में भारी पड़ सकती है।

अगर आप बने हैं शिकार, तो क्या करें?

  1. सबूत जुटाएं: सबसे पहले उस पोस्ट या फोटो का लिंक और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
  2. शिकायत दर्ज करें: नजदीकी साइबर सेल या आधिकारिक नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
  3. कानूनी सलाह: गंभीर मामलों में पीड़ित सीधे सिविल कोर्ट में मानहानि (Defamation) का मुकदमा दायर कर सकता है।

क्या माफी से मामला सुलझ सकता है?

अक्सर आरोपी पोस्ट हटाकर और माफी मांगकर बचने की कोशिश करते हैं। यदि पीड़ित पक्ष संतुष्ट हो जाए, तो मामला वहीं खत्म हो सकता है। लेकिन अगर पीड़ित कानूनी कार्रवाई पर अड़ा रहे, तो केवल माफी मांग लेने से आरोपी को सजा से राहत नहीं मिलती है। डिजिटल युग में पोस्ट करने से पहले सावधान रहना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।

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