नई दिल्ली: दिल्ली के बुनियादी ढांचे के विकास में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने दिल्ली पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के लिए एक स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही राजधानी के निर्माण कार्यों में नई गति और प्रशासनिक जवाबदेही आने की उम्मीद है।
30 साल पुरानी मांग हुई पूरी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली के लिए अलग इंजीनियरिंग कैडर की जरूरत पिछले तीन दशकों से महसूस की जा रही थी, लेकिन यह मामला लंबे समय से ठंडे बस्ते में था। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी सरकार ने इस प्रक्रिया को प्राथमिकता दी और मात्र डेढ़ साल के भीतर केंद्र से इसे मंजूरी दिलाने में सफलता हासिल की।
CPWD से अलग होगा दिल्ली का कैडर इस फैसले के तहत, दिल्ली PWD के 36 अलग-अलग श्रेणियों के कुल 3,214 स्वीकृत इंजीनियरिंग पदों को अब सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) से पूरी तरह अलग कर दिया जाएगा। अब ये सभी पद स्वतंत्र दिल्ली PWD इंजीनियरिंग कैडर के अंतर्गत आएंगे। इससे दिल्ली सरकार को अपने इंजीनियरिंग स्टाफ पर बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त होगा।
बढ़ेगी काम की रफ्तार, घटेगी देरी स्वतंत्र कैडर बनने से सबसे बड़ा फायदा रिक्त पदों को भरने में मिलेगा। अब विभाग को नई नियुक्तियों और इंजीनियरिंग अधिकारियों की पदस्थापना के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे सड़कों, पुलों और सरकारी भवनों के निर्माण में आने वाली रुकावटें कम होंगी और प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था बन सकेगी।
विकास कार्यों को मिलेगी नई दिशा दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं—जैसे कि नया सचिवालय, 11 जिलों में मिनी-सचिवालय, मंडियों का आधुनिकीकरण और खेल के बुनियादी ढांचे का विस्तार—के लिए इस स्वतंत्र कैडर को एक बड़ी ताकत माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल निर्माण कार्यों में निरंतरता आएगी, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
प्रशासनिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली PWD का अपना कैडर होने से यह विभाग अब अधिक आत्मनिर्भर होकर काम कर सकेगा। इंजीनियरिंग अधिकारियों की जवाबदेही को दिल्ली सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ जोड़ने से प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और समयबद्धता पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी। कुल मिलाकर, यह कदम दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।
दिल्ली के लिए अपना PWD इंजीनियरिंग कैडर बनाने की आवश्यकता करीब 30 वर्षों से लंबित थी।
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 9, 2026
हमारी सरकार ने निर्णय लिया, प्रक्रिया आगे बढ़ाई और अब केंद्र सरकार की स्वीकृति से डेढ़ साल में ही दिल्ली को अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। रिक्त पद तेजी से भरे… pic.twitter.com/iwgcnpyv2H
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