जेएनपीटी-न्यू उंबरगांव फ्रेट कॉरिडोर शुरू: 10 हजार करोड़ के निवेश से माल ढुलाई को मिली सुपरफास्ट रफ्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के एक महत्वपूर्ण हिस्से, जेएनपीटी से न्यू उंबरगांव रेल मार्ग का उद्घाटन कर देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में एक नया अध्याय लिख दिया है। 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह 178 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर उत्तर और पश्चिम भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति देगा।

इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना

इस रेल मार्ग का निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पालघर, वसई और वैतरणा जैसे क्षेत्रों की मरीन क्ले (दलदली मिट्टी) और पहाड़ी इलाकों से गुजरते हुए चार अत्याधुनिक टनल का निर्माण किया गया है। इसे विशेष रूप से डबल-स्टैक कंटेनरों की ऊंचाई को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जो भारत में माल ढुलाई के आधुनिक मानक स्थापित करेगा।

घटेगी लॉजिस्टिक्स लागत, बढ़ेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, इस कॉरिडोर के शुरू होने से सड़क मार्ग पर मालवाहक वाहनों का दबाव काफी कम होगा। वर्तमान में भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 14 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत पर आ गई है, जिसे इस परियोजना के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद 7 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है।

जेएनपीटी की क्षमता में 15% इजाफे की उम्मीद

देश के कुल कंटेनर ट्रैफिक का 55 फीसदी हिस्सा संभालने वाले जेएनपीटी (JNPT) के लिए यह कॉरिडोर गेम चेंजर साबित होगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जेएनपीटी के कारोबार में 15 फीसदी तक की वृद्धि होगी। 2029-30 तक पोर्ट की क्षमता को 10 लाख टीईयू (TEU) से अधिक तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।

तकनीकी चुनौती और सफलता

कलंबोली में 1,500 टन वजनी और 110 मीटर लंबे फ्लाईओवर गर्डर को चालू रेल यातायात को बाधित किए बिना स्थापित करना इस परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि रही। 51 लाख मैन-आवर्स के परिश्रम से तैयार यह मार्ग न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि यात्री ट्रेनों के लिए भी मौजूदा रेल नेटवर्क को सुगम बनाएगा।

भविष्य की राह: वाढवण बंदरगाह

इस कॉरिडोर के साथ ही राज्य सरकार अब वाढवण बंदरगाह पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो जेएनपीटी से तीन गुना बड़ा होगा। राज्यपाल जिष्णु देव शर्मा ने कहा कि रायगढ़, ठाणे और पालघर से गुजरने वाला यह मार्ग महाराष्ट्र को देश का प्रमुख समुद्री और आर्थिक केंद्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

प्रधानमंत्री द्वारा दिखाई गई हरी झंडी के साथ, पहली डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन ने अपनी यात्रा शुरू कर दी है, जो भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक मजबूत केंद्र बनाने के संकल्प को साकार कर रही है।

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