जम्मू-कश्मीर में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान राष्ट्र गीत वंदे मातरम के पूर्ण गायन ने देश की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। समारोह में राष्ट्र गीत के सभी छह छंद गाए गए, जिसके सम्मान में मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला समेत तमाम नेता करीब तीन मिनट तक सावधान की मुद्रा में खड़े रहे।
कांग्रेस की आपत्ति और नसीहत इस घटना के बाद कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस को नसीहत दी। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण उस बहुलवादी सोच के अनुरूप नहीं है, जिसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने संजोया था। कांग्रेस का तर्क है कि देश को केवल वे दो छंद ही अपनाने चाहिए जिन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मान्यता दी गई थी।
भाजपा का तीखा पलटवार कांग्रेस की इस टिप्पणी पर भाजपा ने जोरदार हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि संसद द्वारा वंदे मातरम के पूर्ण गायन के संबंध में नियमों के बावजूद कांग्रेस का विरोध पार्टी का असली चेहरा उजागर करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब कांग्रेस के सहयोगी दल भी राष्ट्र गीत के सम्मान में खड़े हो रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को इसमें भी समस्या दिख रही है।
21वीं सदी की मुस्लिम लीग का आरोप भाजपा ने इस विवाद को और आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस अब 21वीं सदी की मुस्लिम लीग बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेकुलरिज्म का नकाब ओढ़े कांग्रेस वास्तव में कट्टरपंथी ताकतों के सामने आत्मसमर्पण कर रही है। भाजपा के अनुसार, कांग्रेस का यह रुख देश विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
राजनीतिक ध्रुवीकरण की नई कहानी जहाँ एक ओर कांग्रेस इसे स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों और समावेशी भारत की रक्षा से जोड़ रही है, वहीं भाजपा इसे देशभक्ति और संवैधानिक मर्यादाओं के साथ जोड़कर पेश कर रही है। जम्मू-कश्मीर के मंच से शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय सुर्खियों में है, जिसने आने वाले चुनावों से पहले एक बार फिर वैचारिक और राजनीतिक टकराव को तेज कर दिया है।
*The full version of Vande Mataram sits uneasily with the syncretic and pluralist ethos that our freedom fighters envisioned and nurtured for India.
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) September 8, 2026
For us, the considered judgment of Mahatma Gandhi, Pandit Nehru, Sardar Patel, Subhash Chandra Bose, Rajendra Prasad, Acharya… pic.twitter.com/VngmVUmevz
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