सीएम योगी पर टिप्पणी पड़ी भारी: पूर्व BBC रिपोर्टर हुदा जरीवाला गिरफ्तार, सहारनपुर मस्जिद विवाद का पूरा सच
News Image

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में पूर्व BBC रिपोर्टर और यूट्यूबर हुदा जरीवाला को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने शांतिभंग के आरोप में उनका चालान कर जेल भेज दिया है।

क्या है मस्जिद विवाद? सहारनपुर प्रशासन ने 5 सितंबर को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन का दावा है कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से बना था, जिसके लिए स्थानीय अदालत ने आदेश दिया था। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया।

हुदा जरीवाला के दावे और सवाल हुदा जरीवाला ने अपने वायरल वीडियो में प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कलेक्ट्रेट की जमीन पर मस्जिद नहीं, बल्कि मस्जिद की जमीन पर कलेक्ट्रेट बना है। उन्होंने थानों में बने मंदिरों का उदाहरण देते हुए प्रशासन से सवाल किया कि केवल मस्जिद को ही अवैध क्यों माना जा रहा है?

कुरान के अपमान का आरोप हुदा ने अपने वीडियो में यह सनसनीखेज दावा भी किया कि मस्जिद गिराए जाने के दौरान पवित्र कुरान की प्रतियां और इमाम के सामान को मलबे के साथ अपमानजनक तरीके से फेंक दिया गया। इन्हीं टिप्पणियों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

सर्किट हाउस में हुई नोकझोंक विवाद तब और गहरा गया जब सोमवार को हुदा सहारनपुर के सर्किट हाउस पहुंचीं। वहां सपा प्रतिनिधिमंडल के साथ जाने को लेकर उनकी पुलिसकर्मियों से तीखी बहस हुई। महिला पुलिसकर्मियों द्वारा हटाने के प्रयास के बावजूद वह नहीं हटीं, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई पुलिस का कहना है कि सीएम योगी और जिलाधिकारी के खिलाफ की गई अमर्यादित टिप्पणी के कारण ही यह कार्रवाई की गई है। मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद इलाके में पोस्टर लगाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश के आरोप में कई अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भड़काऊ गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लोकतंत्र और जिम्मेदारी का सवाल यह घटना एक बार फिर इस बहस को जन्म देती है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएं क्या हैं? जहां सरकार से सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है, वहीं एक पत्रकार या प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर संयमित भाषा का उपयोग करना भी समान रूप से अनिवार्य है। अब यह मामला कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच के महीन संतुलन की परीक्षा बना हुआ है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

दलीप ट्रॉफी फाइनल: ईस्ट जोन का पहाड़ जैसा स्कोर, दबाव में साउथ जोन के 6 विकेट गिरे

Story 1

वडोदरा में गरजे पीएम मोदी: नाराज फूफा गैंग पर साधा निशाना, विकास के नाम पर विपक्ष को घेरा

Story 1

DRS पर ईशान किशन कन्फ्यूज, युवा वैभव सूर्यवंशी ने पलटा पासा; देखें वायरल वीडियो

Story 1

वडोदरा को ₹35,000 करोड़ की बड़ी सौगात, पीएम मोदी बोले- विकसित भारत की रफ्तार होगी और तेज

Story 1

दिल्ली: शोर मचाने पर टोकना पड़ा भारी, मणिपुरी संगीतकार की पीट-पीटकर हत्या

Story 1

भारत-चीन संबंधों का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट : क्या दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन में पिघलेगी लद्दाख की बर्फ?

Story 1

काउंटी क्रिकेट में खौफनाक शुरुआत: सिर्फ 69 रन पर ढेर हुई टीम, बॉलर ने अकेले तोड़ी कमर

Story 1

रील के चक्कर में मौत को बुलावा: दोस्तों ने कहा भगवान शांति दे और युवक ने 30 फीट ऊपर से लगा दी छलांग

Story 1

6G की वैश्विक दौड़ में भारत की बड़ी एंट्री: अमेरिका और 24 देशों के साथ मिलाया हाथ

Story 1

जयपुर: सड़क पर रील का जुनून, एंबुलेंस में जूझता रहा जिंदगी और मौत से मरीज