संगरूर: मंत्री से सवाल पूछने वाले गुलजार ने की आत्महत्या, पंचायत के अपमान ने ली जान
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पंजाब के संगरूर में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां अपनी आवाज उठाने वाले गुलजार सिंह नामक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। गुलजार ने राज्य के वित्त मंत्री हरपाल चीमा के कार्यक्रम में नशे के बढ़ते प्रकोप पर सवाल पूछा था, जो उन्हें काफी भारी पड़ा।

अपमान और पंचायत का दबाव आरोप है कि सवाल पूछने के बाद गुलजार को स्थानीय सरपंच और गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के भारी दबाव का सामना करना पड़ा। उन्हें सार्वजनिक रूप से मंत्री से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया। पंचायत में हुए इस अपमान से आहत होकर गुलजार ने जहर खा लिया। उन्हें गंभीर हालत में लुधियाना के DMCH में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

पुलिस की कार्रवाई और SC/ST एक्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए संगरूर पुलिस ने एक्शन लिया है। गुलजार सिंह अनुसूचित जाति से थे, इसलिए पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के साथ-साथ SC/ST एक्ट की धाराएं भी केस में जोड़ी हैं। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक 3-4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि, मृतक के परिजन अभी भी पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी नहीं हुए हैं।

विरोध बना मौत का कारण? माना जा रहा है कि गुलजार सिंह एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जो लंबे समय से नशे के खिलाफ मुखर थे। उन्होंने पहले भी मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ छत पर चढ़कर काले झंडे दिखाए थे। परिजनों और विपक्ष का आरोप है कि सरकार की आलोचना करने के कारण उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। यह भी दावा किया जा रहा है कि पुलिस हिरासत में गुलजार को बेरहमी से पीटा गया था।

राजनीतिक घमासान तेज इस घटना ने पंजाब की सियासत में भूचाल ला दिया है। शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने सरकार पर आतंकियों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया है, वहीं विक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि क्या अब पंजाब में सवाल पूछना अपराध है? भाजपा ने भी भगवंत मान सरकार को घेरते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।

सीएम का अपना जिला बना विवादों का केंद्र संगरूर जिला मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह क्षेत्र होने के साथ-साथ आप का गढ़ माना जाता है। वित्त मंत्री हरपाल चीमा भी यहीं से ताल्लुक रखते हैं। एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी बड़ी घटना है जिसने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है। जानकारों का कहना है कि सरकार के खिलाफ उठती आवाजों को दबाने की कोशिशें अब आप के लिए ही गले की फांस बनती जा रही हैं।

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