अगर आप अब तक दुनिया का नक्शा देखकर यह सोचते थे कि कौन सा देश कितना बड़ा है, तो शायद आपकी जानकारी अधूरी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अब एक ऐसे प्रस्ताव का समर्थन किया है, जो दशकों से इस्तेमाल हो रहे मर्केटर मैप (Mercator Map) की खामियों को उजागर करता है और देशों के वास्तविक क्षेत्रफल को सही तरीके से दिखाने पर जोर देता है।
मर्केटर मैप क्यों है भ्रामक? 1569 में बना मर्केटर प्रोजेक्शन असल में नाविकों के लिए बनाया गया था, ताकि समुद्री यात्राओं में दिशा और कोण सही रहें। इसका क्षेत्रफल की सटीकता से कोई लेना-देना नहीं था। इस मैप में भूमध्य रेखा (Equator) से दूर स्थित देश जैसे रूस, कनाडा और ग्रीनलैंड अपने वास्तविक आकार से कहीं ज्यादा बड़े दिखाई देते हैं। उदाहरण के तौर पर, इस पुराने मैप में ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग बराबर दिखते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से 14 गुना ज्यादा है।
इक्वल अर्थ (Equal Earth) मैप क्या है? नया इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन देशों के वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात को बनाए रखने पर केंद्रित है। इसमें यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे देशों का आकार छोटा दिखता है, जबकि भारत, दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे इलाके अपने असली और बड़े आकार में नजर आते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 164 देशों के समर्थन से इस दिशा में पहल की है, ताकि दुनिया का भौगोलिक ज्ञान अधिक सटीक हो सके। अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
क्या भारत का नक्शा बदल जाएगा? निश्चित रूप से नहीं। किसी देश की जमीन का आकार नहीं बदलेगा, केवल नक्शे पर उसके दिखने का पैमाना बदलेगा। संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव किसी के लिए अनिवार्य नहीं है, यह केवल सरकारों और शैक्षणिक संस्थानों को अधिक सटीक नक्शे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। भारत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही जोर दिया है कि आधिकारिक मैप में देश की सीमाओं का पूरी तरह सही चित्रण होना चाहिए।
क्या पुराने नक्शे पूरी तरह बेकार हैं? बिल्कुल नहीं। मर्केटर प्रोजेक्शन आज भी समुद्री और हवाई नेविगेशन के लिए सबसे उपयोगी है, क्योंकि यह दिशाओं को सही रखने में माहिर है। संयुक्त राष्ट्र का नया कदम सिर्फ भौगोलिक शिक्षा और वैश्विक समझ को सुधारने के लिए है ताकि दुनिया के देशों के वास्तविक आकार का सही अंदाजा लगाया जा सके।
Areal distortion caused by Mercator projection; comparison showing actual relative size of each country. pic.twitter.com/oEZB9WV0uu
— Epic Maps 🗺️ (@theepicmap) September 6, 2026
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