मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र का रुख साफ होने के बाद ही तय होगी सुनवाई की तारीख
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नई दिल्ली: वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) को अपराध घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मामले की सुनवाई की तारीख तय करने से पहले केंद्र सरकार का आधिकारिक रुख जानना अनिवार्य है।

क्या है वर्तमान स्थिति? वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष यह मुद्दा उठाया। उन्होंने नवंबर में इस मामले पर विस्तृत सुनवाई के लिए तारीख तय करने का अनुरोध किया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि केंद्र सरकार अपना क्या पक्ष रखती है।

केंद्र ने अब तक नहीं दिया ठोस जवाब सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि केंद्र सरकार ने अभी तक इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई ठोस जवाब दाखिल नहीं किया है। सरकार ने केवल एक प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराई है। याचिकाओं की प्रतियों का आदान-प्रदान भी संबंधित पक्षों के बीच अभी तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे मामले की स्पष्टता पर संशय बना हुआ है।

सुनवाई की प्रक्रिया पर कोर्ट का रुख सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला बुधवार के लिए सूचीबद्ध है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब केंद्र सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा, उसके बाद ही आगे की सुनवाई की उपयुक्त तारीख निर्धारित की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने भी आग्रह किया है कि एक निश्चित तारीख तय की जाए ताकि सभी पक्ष अपनी दलीलें और आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा कर सकें।

कानूनी पेच: धारा 375 का अपवाद विवाद का मुख्य केंद्र भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 का अपवाद है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि पत्नी नाबालिग नहीं है, तो पति द्वारा जबरन शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म (Rape) की श्रेणी में नहीं आता। याचिकाकर्ता इसी संवैधानिक वैधता को चुनौती दे रहे हैं।

अगला कदम क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2023 में ही केंद्र से इस पर विस्तृत जवाब मांगा था। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस जटिल सामाजिक और कानूनी मुद्दे पर क्या स्टैंड लेती है। याचिकाओं में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया है कि क्या एक वयस्क पत्नी को जबरन यौन संबंधों से संरक्षण मिलना चाहिए या पति को इसके लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।

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