सत्य निकेतन हादसा: युवाओं को कॉकरोच समझने वाली व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरी CJP, रखीं 7 बड़ी मांगें
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दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस घटना को व्यवस्था की नाकामी करार देते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं।

युवाओं को कॉकरोच की तरह जीने के लिए छोड़ दिया

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों ने युवाओं को कॉकरोच के समान समझ लिया है। उन्होंने कहा, जब युवा अपने हक और सुरक्षा के लिए सवाल पूछते हैं, तो उन्हें नाराज़ फूफा या दिमागी नक्सली का ठप्पा लगाकर चुप करा दिया जाता है।

बिल्डिंग हादसे में नेक्सस की जांच जरूरी

सौरव दास ने आरोप लगाया कि सत्य निकेतन में चल रहे अवैध पीजी (PG) माफिया को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने मांग की कि बिल्डिंग मालिक के राजनीतिक संबंधों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चश्मदीदों के अनुसार, एमसीडी ने बिल्डिंग को असुरक्षित घोषित किया था, फिर भी वहां निर्माण कार्य जारी था और छात्र वहां रह रहे थे।

सरकार के सामने CJP की 7 सूत्रीय मांगें

CJP ने इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए सात प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. स्वतंत्र आपराधिक जांच: हादसे की ही नहीं, बल्कि पीजी मालिकों और राजनेताओं के बीच के गठजोड़ की भी जांच हो।
  2. स्ट्रक्चरल ऑडिट: दिल्ली और देशभर की इमारतों, विशेषकर स्कूलों और कॉलेजों का इंजीनियरिंग-ग्रेड स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य हो।
  3. निष्क्रिय समितियों का खुलासा: हौज रानी हादसे के बाद बनी 13 जिला समितियों के काम का रिकॉर्ड 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक किया जाए।
  4. ऑनलाइन डेटाबेस: एक पब्लिक सर्च-डेटाबेस बने, जहां छात्र किसी भी पीजी की सुरक्षा और कानूनी स्थिति की जांच कर सकें।
  5. हॉस्टल निर्माण: यूनिवर्सिटी में लाखों छात्रों के मुकाबले केवल 7,000 आवास हैं। सरकार एक समय-सीमा के भीतर नए हॉस्टल बनाए।
  6. मुआवजा: मृतकों के परिवारों को ₹1 करोड़ और घायलों को ₹20 लाख का मुआवजा एक तय समय-सीमा में दिया जाए।
  7. मंत्रियों की जवाबदेही: शहरी विकास और शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय हो, क्योंकि उनके विभागों के अधीन बनी कमेटियां पूरी तरह विफल रही हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और कोर्ट का रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और एनएचआरसी को नोटिस जारी किया है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और बिल्डिंग के मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

CJP का कहना है कि महज निलंबन काफी नहीं है, वास्तविक जवाबदेही तब तय होगी जब भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता सिस्टम बनाया जाएगा।

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