लंदन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत अपनी तीन देशों की विदेश यात्रा के अंतिम चरण में ब्रिटेन पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने लंदन में न केवल धार्मिक स्थलों का दौरा किया, बल्कि हिंदुत्व और एकता को लेकर एक नया दृष्टिकोण भी पेश किया।
ऐतिहासिक गुरुद्वारे में मत्था टेका मोहन भागवत ने लंदन स्थित ऐतिहासिक खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा में मत्था टेका। यह गुरुद्वारा 1908 से अस्तित्व में है और भारत के बाहर बने सबसे पुराने गुरुद्वारों में से एक माना जाता है। संघ प्रमुख ने पारंपरिक रूप से रुमाला साहिब भेंट किया और कड़ा प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ सार्थक बातचीत भी की।
जन्माष्टमी और एकता का उत्सव गुरुद्वारे के बाद मोहन भागवत विल्सडेन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने जन्माष्टमी उत्सव में हिस्सा लिया। इसके अलावा, उन्होंने एक कम्युनिटी सेंटर में सेलिब्रेशन ऑफ वननेस (एकता का उत्सव) थीम पर आयोजित एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने इस दौरे के दौरान उनकी सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
हिंदू राष्ट्र पर स्पष्ट किया रुख सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदू राष्ट्र का विचार किसी विशेष पूजा-पद्धति, धर्म या जीवनशैली को थोपने के बारे में नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, एकता के लिए एकरूपता (Uniformity) आवश्यक नहीं है। उनके अनुसार, हिंदू राष्ट्र का मूल आधार विविधता को स्वीकार करना और अलग-अलग विचारों का सम्मान करना है।
ग्लोबल आउटरीच: हिंदुत्व पर भ्रम दूर करने की कोशिश आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हो रहा यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी देशों में हिंदुत्व को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना है। संघ इस माध्यम से दुनिया भर के शिक्षाविदों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रभावशाली लोगों के साथ भारत की सभ्यता और संस्कृति पर संवाद स्थापित करना चाहता है।
RSS Sarasanghachalak Dr Mohan Bhagwat visited and offered prayers at Gurudwara, located at Khalsa Jatha British Isle, London, UK. pic.twitter.com/fNZs8fc6tP
— Rajesh Padmar (@rajeshpadmar) September 5, 2026
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