इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का तांडव: 50 हजार फीट तक उठा राख का गुबार, 8 एयरपोर्ट बंद
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इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के अचानक सक्रिय होने से पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में हड़कंप मच गया है। रविवार को हुए भीषण विस्फोट के बाद आसमान में 50 हजार फीट की ऊंचाई तक राख का गुबार फैल गया है, जिससे हवाई यातायात पूरी तरह चरमरा गया है।

8 एयरपोर्ट बंद, 1.70 लाख यात्री प्रभावित

ज्वालामुखी से निकली राख के कारण जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा और हलीम पेरदानाकुसुमा समेत कुल आठ हवाई अड्डों को बंद करना पड़ा है। सोमवार तक 1,550 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिससे लगभग 1.70 लाख यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

50 हजार फीट तक फैला राख का बादल

मौसम एजेंसी (बीएमकेजी) के अनुसार, उपग्रहों से ज्वालामुखी की राख के दो बड़े बादल ट्रैक किए गए हैं। इनमें से एक 20 हजार और दूसरा 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा है। इसका असर जकार्ता, बैंटन, लैम्पुंग और सुमात्रा के तटीय इलाकों तक देखा जा रहा है। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है।

जुलाई से सुलग रहा था ज्वालामुखी

जियोलॉजिकल एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने बताया कि अनाक क्राकाटोआ में जुलाई से ही हलचल बढ़ गई थी और रविवार का धमाका इस साल का सबसे शक्तिशाली विस्फोट है। ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और गैस का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक विस्फोटों की आशंका बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द, स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई

स्थिति को देखते हुए सिंगापुर एयरलाइंस ने भी 6 और 7 सितंबर को जकार्ता आने-जाने वाली 10 उड़ानें रद्द कर दी हैं। वहीं, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं। निवासियों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी गई है।

क्राकाटोआ का खौफनाक इतिहास

अनाक क्राकाटोआ ( क्राकाटोआ का बच्चा ) उसी स्थान पर स्थित है, जहां 1883 में दुनिया का सबसे विनाशकारी ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था, जिसमें 36 हजार लोगों की मौत हुई थी। 2018 में भी इसके एक हिस्से के समुद्र में गिरने से सुनामी आई थी, जिसमें 430 लोगों ने जान गंवाई थी। इंडोनेशिया अभी रिंग ऑफ फायर क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण लगातार प्राकृतिक आपदाओं के खतरे का सामना कर रहा है।

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