झारखंड की राजनीति से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात निधन हो गया। गिरिडीह स्थित उनके आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात सुदिव्य कुमार सोनू अपने आवास पर थे, तभी उन्हें सीने में तीव्र दर्द महसूस हुआ। परिजनों ने तत्काल उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उनकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन उनकी स्थिति नाजुक बनी रही। हार्ट अटैक का असर इतना गहरा था कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची शिफ्ट करने का समय भी नहीं मिल सका।
मंत्री के निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह में शोक की लहर दौड़ गई। अस्पताल परिसर और उनके आवास पर झामुमो कार्यकर्ताओं, समर्थकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पार्टी के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है, क्योंकि सोनू को संगठन और सरकार के बीच एक मुखर और ऊर्जावान कड़ी माना जाता था। झामुमो ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर उनके निधन को जीवन की अनिश्चितता करार देते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है।
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक करियर काफी प्रेरणादायक रहा। 2019 में गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से पहली बार जीत दर्ज करने वाले सोनू ने 2024 के चुनाव में भी अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। उनकी सक्रियता और सूझबूझ को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें अपनी कैबिनेट में शामिल किया था। वे नगर विकास, पर्यटन, खेलकूद और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाल रहे थे।
सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बेहद भरोसेमंद माना जाता था। हाल ही में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षा विवाद के दौरान उन्होंने सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। सरकार का पक्ष मजबूती से रखने और संवाद स्थापित करने की उनकी शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी।
चिकित्सकों के अनुसार, सुदिव्य कुमार का निधन हृदय की धमनियों में अचानक आए अवरोध (हार्ट अटैक) के कारण हुआ। विशेषज्ञों की मानें तो अत्यधिक मानसिक तनाव, खानपान की गलत आदतें और जीवनशैली का दबाव हृदय रोगों का मुख्य कारण बनता है।
सीने में भारीपन, सांस लेने में दिक्कत, पसीना आना और जबड़े या बाएं हाथ में दर्द हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में देरी जानलेवा साबित होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह है कि स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच (ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल) ही इस तरह के आकस्मिक संकटों से बचने का एकमात्र रास्ता है।
*ज़िंदगी की क्षणभंगुरता…
— Jharkhand Mukti Morcha (@JmmJharkhand) September 6, 2026
कल तक जो साथी हमारे बीच थे, आज उनकी स्मृतियाँ ही हमारे साथ हैं। जीवन की अनिश्चितता हमें एक बार फिर गहरे दुःख और शोक में छोड़ गई है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित साथी एवं झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन से पूरा झामुमो परिवार… pic.twitter.com/CqsHItNpzR
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