भारत नहीं, अपनों से ही डरा पाकिस्तान: मरियम नवाज की स्वीकारोक्ति से मचा हड़कंप
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पाकिस्तानी पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने इस्लामाबाद की दशकों पुरानी कूटनीति की कलई खोल दी है। लाहौर में थ्रेट असेसमेंट सेंटर (PIFTAC) के उद्घाटन के दौरान मरियम ने साफ कहा कि पाकिस्तान को सुरक्षा का असली खतरा भारत या अफगानिस्तान से नहीं, बल्कि अपने ही प्रांतों—खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान से है।

शरीफ परिवार ने कबूला कड़वा सच

यह बयान इसलिए बेहद अहम है क्योंकि मरियम नवाज उस शरीफ परिवार से आती हैं, जिसने पाकिस्तान को दो प्रधानमंत्री दिए हैं। वर्षों से पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। अब उन्हीं के घर से आई इस आवाज ने स्पष्ट कर दिया है कि जिसे वे नॉन-स्टेट एक्टर्स कहकर पल्ला झाड़ते थे, वह असल में उनकी अपनी बनाई हुई अंदरूनी आग है।

आतंकवाद: पाकिस्तान की स्टेट पॉलिसी का काला अध्याय

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ (FATF) में यह साबित करता आया है कि पाकिस्तान आतंकवाद को एक स्टेट पॉलिसी की तरह इस्तेमाल करता है। खुफिया एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में आतंकियों को पालना और फिर वैश्विक दबाव से बचने के लिए भारत पर दोष मढ़ना पाकिस्तान का पुराना ढकोसला रहा है।

एफएटीएफ और आर्थिक तंगहाली का दबाव

पाकिस्तान को अक्सर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (IMF/World Bank) से कर्ज लेने के लिए आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का ढोंग करना पड़ता है। हालांकि, हकीकत यह है कि देश की इकॉनमी चीन और अमेरिका के रहमो-करम पर टिकी है। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब मरियम नवाज ने आंतरिक असुरक्षा को स्वीकार कर लिया।

क्या आसिम मुनीर के लिए बढ़ी चुनौती?

मरियम नवाज का यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की सेना और खुफिया तंत्र की विफलता पर सवाल खड़े करता है। जिस तरह से उन्होंने बलूचिस्तान और KPK का नाम लिया है, उससे साफ है कि पाकिस्तानी सेना के मुखिया आसिम मुनीर के लिए अब अपने घर को संभालना बड़ी चुनौती बन गया है।

प्रोपेगेंडा की हार, हकीकत की जीत

दशकों से कश्मीर के नाम पर भारत विरोधी एजेंडा चलाने वाले पाकिस्तान के लिए यह एक आत्मघाती मोड़ है। मरियम के इस विस्फोटक बयान ने यह साबित कर दिया है कि जिस आतंकवाद का डर दिखाकर पाकिस्तान दुनिया से सहानुभूति बटोरता था, वह वास्तव में उनकी अपनी आंतरिक नीतियों का नतीजा है। अब पाकिस्तान के इन हुक्मरानों के लिए अपनी ही जमीन पर पनपते इन खतरों से निपटना किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा।

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