सहारनपुर में मस्जिद पर चला बाबा का बुलडोजर : क्या 2027 के चुनाव में यह बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा?
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सहारनपुर: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बुलडोजर की गूंज सुनाई दे रही है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद को ढहाने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस कार्रवाई ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक नए राजनीतिक नैरेटिव की नींव रख दी है।

तड़के हुआ बुलडोजर एक्शन

शनिवार तड़के करीब 4 बजे प्रशासन ने भारी सुरक्षा बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती के बीच कलेक्ट्रेट स्थित मस्जिद को जमींदोज कर दिया। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी है। सिटी मजिस्ट्रेट और जिला अदालत ने इस ढांचे को सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण माना था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।

इकरा हसन हाउस अरेस्ट, विपक्ष का हल्ला बोल

घटना की जानकारी मिलते ही कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर सामाजिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया और कहा कि सरकार की असल जिम्मेदारी सौहार्द बनाए रखना है।

100 साल पुरानी मस्जिद का दावा

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 1911 के दस्तावेजों का हवाला देते हुए सवाल किया कि जो मस्जिद दशकों से अस्तित्व में थी, उसे कैसे अवैध माना जा सकता है? ओवैसी ने इसे मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों पर प्रहार बताया है। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस जल्दबाजी में की गई कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

क्या 2027 में ध्रुवीकरण होगा मुख्य मुद्दा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सहारनपुर का यह घटनाक्रम 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं, वहां यह मुद्दा धार्मिक अस्मिता से जुड़ गया है। भाजपा इसे कानून का राज बताकर अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है, तो विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश के रूप में पेश कर रहे हैं।

बढ़ेगा विपक्ष का दबाव?

इकरा हसन की घेराबंदी और ओवैसी के आक्रामक तेवर यह संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में मुस्लिम वोटों को लेकर सपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम के बीच खींचतान बढ़ेगी। फिलहाल, सहारनपुर में तनाव के बीच प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। देखना होगा कि यह मुद्दा विपक्ष को सरकार के खिलाफ कितना बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करने का मौका देता है।

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