नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा रखी है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 1,344 तक पहुँच गई है, जबकि 5,053 लोग अभी भी लापता हैं।
कहां, कितना है नुकसान? बाढ़ और हिमस्खलन ने सबसे ज्यादा कहर चितवन और नवलपरासी इलाकों में बरपाया है। चितवन में अकेले 359 लोगों की मौत हुई है। वहीं, नवलपरासी पूर्व में 221 और नवलपरासी पश्चिम में 212 लोगों ने जान गंवाई है। नुवाकोट, रसुवा, धादिंग, गोरखा और तनहुं में भी भारी जनहानि हुई है। कुल 5,663 लोग घायल हुए हैं।
बुनियादी ढांचे पर गहरा प्रहार प्रकृतिक आपदा ने नेपाल की कमर तोड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 7,570 निजी घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हुए हैं। 55 किलोमीटर लंबी सड़क मार्ग के साथ-साथ 37 मोटर योग्य पुल और 68 झूला पुल बह गए हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
राहत और बचाव का संघर्ष अब तक 13,095 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। सेना और पुलिस की टीमें दुर्गम इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। हालांकि, मलबा हटने के साथ मृतकों के मिलने का सिलसिला अभी भी जारी है, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सुरंग में जिंदगी की जंग: चमत्कारिक बचाव इस विनाशकारी त्रासदी के बीच एक चमत्कारिक घटना भी सामने आई है। बाढ़ के मलबे और चट्टानों के कारण एक सुरंग में फंसे दो लोगों को 9 दिन बाद सुरक्षित निकाल लिया गया। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने सुरंग के भीतर हरे कृष्ण का जाप करते हुए अपनी हिम्मत बनाए रखी और जन्माष्टमी के दिन उन्हें रेस्क्यू टीम ने जिंदा बाहर निकाला।
आपदा का कारण यह भीषण त्रासदी 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के करीब बर्फ और चट्टानों के अचानक हुए हिमस्खलन (Avalanche) के कारण उत्पन्न हुई थी। इस हिमस्खलन ने नदियों के जलस्तर को अचानक बढ़ा दिया, जिससे उत्तर और मध्य नेपाल के कई गांव और कस्बे पल भर में जलमग्न हो गए। बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन खराब मौसम और टूटे संपर्क मार्ग राहत कार्यों में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
रसुवा भोटेकोशी बाढी सम्बन्धी खोज तथा उद्धार अपडेट २०८३।०५।२० गते ०५:०० बजेसम्म pic.twitter.com/C9XgRjnPmX
— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) September 5, 2026
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