दिल्ली के लिए दशकों से सिरदर्द बने ओखला, भलस्वा और गाजीपुर के कूड़े के पहाड़ अब धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमट रहे हैं। युद्धस्तर पर चल रही बायो-माइनिंग और कचरा प्रसंस्करण (Legacy Waste Processing) की प्रक्रिया से राजधानी को न केवल राहत मिल रही है, बल्कि शहर के बीचों-बीच करीब 100 एकड़ की बेशकीमती जमीन भी फिर से उपयोग के लिए उपलब्ध हो गई है।
मिशन मोड में सफाई का कामकाज दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले डेढ़ साल में कचरा हटाने के काम में जबरदस्त तेजी आई है। अब तक इन तीनों साइटों से कुल 2.16 करोड़ मीट्रिक टन पुराना कचरा हटाया जा चुका है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व और राज्य सरकार के साझा प्रयासों का असर यह है कि अब इन लैंडफिल साइटों का आकार तेजी से सिकुड़ रहा है।
कहां कितनी जमीन हुई खाली? सफाई अभियान के ताजा आंकड़ों (अगस्त 2026 तक) पर नजर डालें तो स्थिति काफी उत्साहजनक है:
सिर्फ कचरा हटाना ही लक्ष्य नहीं प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाली सामग्री का भी बेहतर उपयोग किया जा रहा है। कचरे से अलग किए गए इनर्ट मटेरियल (Inert Material) का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण और निचले इलाकों को भरने के लिए किया जा रहा है। इससे कचरा प्रबंधन का चक्र पूरा हो रहा है और संसाधन बर्बाद नहीं हो रहे।
अगली चुनौती: नए कचरे का प्रबंधन सरकार का मुख्य फोकस अब यह सुनिश्चित करने पर है कि खाली हुई जमीन पर फिर से कूड़े के ढेर न लगें। इसके लिए फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग को अनिवार्य किया जा रहा है। यदि रोजाना निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही प्रोसेस नहीं किया गया, तो लैंडफिल का दबाव कम करना नामुमकिन होगा।
खाली जमीन का क्या होगा उपयोग? राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मुक्त हुई इस जमीन को हरित क्षेत्र (Green Zone) और ठोस कचरा प्रबंधन की आधुनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में 100 एकड़ जमीन का खाली होना भविष्य के शहरी विकास के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए राहत कूड़े के पहाड़ों से निकलने वाली दुर्गंध, लीचेट और आग लगने की घटनाओं से स्थानीय निवासियों को लंबे समय से जूझना पड़ रहा था। वैज्ञानिक तरीके से कचरा हटाए जाने से न केवल हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि भूजल प्रदूषण और बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद मिलेगी। भले ही लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है, लेकिन 100 एकड़ जमीन का मुक्त होना इस दिशा में एक बड़ी और ठोस जीत है।
सिर्फ 1.5 साल में ही दिल्ली के कूड़े के पहाड़ घटने लगे हैं। ओखला, भलस्वा और गाजीपुर में अब तक 217.17 लाख मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण कर 100 एकड़ जमीन मुक्त कराई जा चुकी है।
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 4, 2026
दिल्ली की वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में… pic.twitter.com/M9sKCEnKoO
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