क्या शी जिनपिंग की सेहत है खतरे में? पूर्व निर्वासित पीएम के खुलासे से मची हलचल
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेहत को लेकर एक नया और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। तिब्बत की निर्वासित सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री लोबसांग सांगे ने दावा किया है कि शी जिनपिंग को कम से कम दो बार, और शायद तीन बार दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ चुका है।

अंदरूनी सूत्रों का दावा लोबसांग सांगे ने यह जानकारी चीन के एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी के हवाले से दी है। एक पॉडकास्ट के दौरान सांगे ने बताया कि उस अधिकारी के साथ उनकी एक घंटे से अधिक लंबी बातचीत हुई थी। सांगे का कहना है कि अत्यधिक काम और बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण शी जिनपिंग की सेहत पर बुरा असर पड़ा है, जिससे उनके निर्णय लेने की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बिश्केक दौरे पर बिगड़ी तबीयत? हाल ही में चीन डेमोक्रेसी पार्टी के चेयरमैन वानजुन शी ने भी एक ट्वीट के ज़रिए शी जिनपिंग की बिगड़ती शारीरिक स्थिति की ओर इशारा किया। 30 अगस्त को बिश्केक पहुंचते समय शी जिनपिंग काफ़ी सुस्त, पीले और सूजे हुए दिखाई दिए। प्लेन की सीढ़ियां उतरते समय उनकी चाल लड़खड़ा रही थी और उन्हें अपनी पत्नी पेंग लियुआन का सहारा लेना पड़ा, जिसने स्वास्थ्य संबंधी अटकलों को और हवा दे दी है।

‘सम्राट की दुविधा’ और उत्तराधिकार का संकट लोबसांग सांगे ने शी जिनपिंग के सामने खड़ी सम्राट की दुविधा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि शी एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां उत्तराधिकारी घोषित करने से उनका अपना वर्चस्व खतरे में पड़ सकता है, लेकिन उत्तराधिकारी न चुनने से चीन में सत्ता का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। सांगे का मानना है कि यही कारण है कि शी किसी को भी सत्ता सौंपने का जोखिम उठाने से कतरा रहे हैं।

दावों की सच्चाई क्या है? यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि इन दावों की कोई आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट या स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। शी जिनपिंग की सेहत से जुड़ी ये जानकारियां फिलहाल अज्ञात सूत्रों और राजनीतिक विरोधियों के बयानों पर आधारित हैं। हालांकि, चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को अचानक हटाए जाने और शी के हालिया सार्वजनिक व्यवहार ने विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बीजिंग के गलियारों में कुछ तो असामान्य घट रहा है।

कौन हैं लोबसांग सांगे? लोबसांग सांगे 2011 से 2021 तक सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (धर्मशाला) के राजनीतिक प्रमुख रहे हैं। वर्तमान में वह हार्वर्ड लॉ स्कूल में सीनियर विजिटिंग फेलो हैं। चूंकि वे लंबे समय से चीन की नीतियों के आलोचक रहे हैं, इसलिए उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि बीजिंग आने वाले दिनों में इन रिपोर्ट्स पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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