दिल्ली इन दिनों ब्रिक्स (BRICS) चीफ जस्टिस फोरम की मेजबानी कर रही है, जिसमें दुनिया भर के 22 देशों के न्यायिक अधिकारी जुटे हैं। 4 से 6 सितंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में न्याय व्यवस्था और तकनीक जैसे गंभीर विषयों पर मंथन हो रहा है, लेकिन इस बीच ईरान के चीफ जस्टिस अयातुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसिनी-एजेई की जामा मस्जिद यात्रा चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
जामा मस्जिद में भव्य स्वागत शुक्रवार को ईरान के शीर्ष न्यायिक अधिकारी जब जुमे की नमाज अदा करने ऐतिहासिक जामा मस्जिद पहुंचे, तो वहां का नजारा देखते ही बनता था। उन्होंने शाही इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी से मुलाकात की। नमाज के बाद वहां मौजूद भारी भीड़ ने उनका गर्मजोशी से इस्तकबाल किया और उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ मच गई।
भाईचारे का संदेश यह दृश्य इसलिए भी खास है क्योंकि ईरान एक शिया बहुल देश है, जबकि जामा मस्जिद सुन्नी परंपरा का प्रमुख केंद्र है। ईरान के चीफ जस्टिस का वहां के इमाम के पीछे नमाज पढ़ना शिया-सुन्नी सद्भाव और आपसी भाईचारे की एक मजबूत मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत-ईरान के अटूट रिश्ते इमाम बुखारी के साथ बातचीत में मोहसिनी-एजेई ने भारत और ईरान के सदियों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये संस्कृति, भाषा और साहित्य की साझा विरासत से जुड़े हैं। उन्होंने धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और भविष्य के लिए आपसी सहयोग पर जोर दिया।
कड़े तेवर: दबाव के आगे नहीं झुकेंगे नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में धार्मिक विद्वानों के साथ बैठक में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने अमेरिका और इजरायल का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने कभी दबाव और जबरदस्ती के आगे घुटने नहीं टेके हैं और भविष्य में भी वह अपनी नीतियों पर अडिग रहेगा।
ब्रिक्स मंच पर न्यायपालिका का मंथन इस फोरम का उद्देश्य विभिन्न देशों की न्यायपालिकाओं के बीच संवाद को मजबूत करना है। सुप्रीम कोर्ट की मेजबानी में हो रहे इस आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का न्याय में उपयोग, अंतरराष्ट्रीय विवादों का निपटारा और मध्यस्थता जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत इस दौरान रूस, चीन, मिस्र और यूएई समेत कई देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं। दिल्ली में चल रहे इस आयोजन ने एक ओर जहां पेशेवर सहयोग की नींव रखी है, वहीं ईरान के चीफ जस्टिस की यात्रा ने इस पूरे आयोजन को एक मानवीय और सांस्कृतिक पहचान भी दी है।
Ayatollah Gholam-Hossein Mohseni-Ejei, Head of the Judiciary of the Islamic Republic of Iran, attended Friday prayers at Delhi’s Jama Masjid, where he received a warm and enthusiastic welcome from those attending the prayers. pic.twitter.com/NbOk3TBfXE
— Iran in India (@Iran_in_India) September 4, 2026
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