कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर योगी का साफ रुख: हम कोर्ट का सम्मान कर रहे हैं, वरना मथुरा में बहुत कुछ हो गया होता
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देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है, लेकिन इस बीच मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा पहुंचकर न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि अपने पुराने बयानों के जरिए इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राजनीतिक और धाार्मिक लाइन को फिर से दोहराया है।

वो बयान जो आज भी है चर्चा में मार्च 2025 में एक इंटरव्यू के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कृष्ण जन्मभूमि को लेकर एक ऐसा बयान दिया था, जो सोशल मीडिया पर आज भी वायरल रहता है। जब उनसे मथुरा विवाद पर सवाल पूछा गया था, तो उन्होंने सीधा पलटवार करते हुए कहा था, क्या मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि नहीं है? इसके बाद उन्होंने साफ लहजे में कहा कि सरकार कोर्ट के आदेश का पालन कर रही है, वरना अब तक वहां बहुत कुछ हो गया होता।

जन्माष्टमी पर मथुरा पहुंचे योगी शुक्रवार को जन्माष्टमी के अवसर पर सीएम योगी मथुरा पहुंचे। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में करीब 30 मिनट बिताए और श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की। उनका यह दौरा सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं था, उन्होंने ब्रज के विकास का खाका खींचते हुए एक बार फिर हिंदुत्व और सांस्कृतिक विरासत का एजेंडा सेट किया।

बाबर-औरंगजेब का जिक्र और सियासी हमला मंच से संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग बाबर और औरंगजेब में आस्था रखते हैं, वे सनातन परंपरा का सम्मान नहीं कर सकते। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण में आस्था रखती है और प्रदेश की डबल इंजन सरकार किसी भी ऐसे मंसूबे को सफल नहीं होने देगी, जो समाज में विष घोलने या विकास को रोकने की कोशिश करेगा।

अयोध्या-काशी की तर्ज पर विकास का संकल्प योगी ने स्पष्ट किया कि अयोध्या और काशी की तरह ही मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और बरसाना का भी कायाकल्प किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्रज की धार्मिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए इसे भक्तों की भावनाओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। सीएम ने याद दिलाया कि मंदिरों पर विदेशी आक्रमण हुए, लेकिन आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सका।

2027 के चुनाव और मथुरा की बिसात उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में अयोध्या और काशी के बाद मथुरा का मुद्दा भाजपा की राजनीतिक प्राथमिकता में बना हुआ है। हालांकि, कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह का मामला वर्तमान में अदालत की दहलीज पर है, लेकिन योगी के बयानों ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव के दौरान भी आस्था और विकास का यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहेगा।

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