राम मंदिर के नए CEO की नियुक्ति पर घमासान: वीएचपी ने किया स्वागत, सपा ने उठाए गंभीर सवाल
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अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा बदलाव हुआ है। एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला सीईओ (CEO) नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के बाद मंदिर के प्रबंधन और कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।

वीएचपी का रुख: नई शुरुआत के लिए तैयार

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस नियुक्ति का पुरजोर समर्थन किया है। वीएचपी के महासचिव बजरंग लाल बागरा ने ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज से मुलाकात के बाद कहा कि मंदिर प्रबंधन को अधिक कुशल बनाने के लिए नए अधिकारियों और कार्यकर्ताओं की टीम मिल गई है। उन्होंने मंदिर से जुड़े पिछले आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे विवाद मीडिया द्वारा फैलाए गए थे और ट्रस्ट का उनसे कोई लेना-देना नहीं था।

सपा का तंज: सिर्फ चेहरा बदलने से नहीं बदलेगी व्यवस्था

समाजवादी पार्टी ने सीईओ की नियुक्ति को एक सकारात्मक कदम तो माना, लेकिन साथ ही भाजपा सरकार पर निशाना भी साधा। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि सिर्फ एक सीईओ बदलने से प्रशासनिक ढांचा नहीं सुधरता। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चंदा चोरी के आरोप लगे थे, तो चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोविंद गिरि के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई? सपा ने भाजपा से प्रशासनिक खामियों को दूर करने की मांग की है।

इकबाल अंसारी ने किया स्वागत

बाबरी-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने नए सीईओ की नियुक्ति का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जितेंद्र मिश्रा के आने से श्रद्धालुओं को दर्शन में आसानी होगी और मंदिर परिसर में बेहतर व्यवस्थाएं देखने को मिलेंगी। उन्होंने ट्रस्ट में हुए बदलावों को सकारात्मक दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

मौलाना साजिद रशीदी ने दी अग्निपरीक्षा की चेतावनी

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने नए सीईओ के सामने आने वाली चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि सेना में लंबा अनुभव रखने वाले जितेंद्र मिश्रा के लिए अब असली चुनौती खोया हुआ विश्वास बहाल करना है। रशीदी ने दो टूक कहा कि नए सीईओ की असली परीक्षा मंदिर के फंड के पारदर्शी उपयोग और प्रबंधन में सुधार लाने की होगी।

अब सबकी निगाहें एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा के काम करने के तरीकों और मंदिर प्रशासन में आने वाले बदलावों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इन राजनीतिक आरोपों और प्रबंधन की चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं।

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