भारतीय वायुसेना के जाबांज ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने 22 साल की गौरवशाली सेवा के बाद प्री-मेच्योर रिटायरमेंट ले ली है और अब वे नागरिक उड्डयन (सिविल एविएशन) की दुनिया में कदम रख चुके हैं। 2019 में पाकिस्तान की कैद से सुरक्षित वापस लौटने वाले अभिनंदन की कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जब कोई सैनिक दुश्मन की कैद से छूटकर वापस आता है, तो उसके करियर और भविष्य का फैसला कैसे होता है?
जिनेवा कन्वेंशन के तहत किसी भी सैनिक की रिहाई के बाद उसे वापस वतन भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। भारत लौटने के बाद, सैनिक को डीब्रीफिंग और रिपैट्रिएशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। यह एक अत्यंत गंभीर प्रक्रिया है, जिसमें सैनिक का गहन मेडिकल और साइकोलॉजिकल टेस्ट होता है।
विशेषज्ञ यह जांचते हैं कि कहीं दुश्मन ने सैनिक को कोई खतरनाक इंजेक्शन तो नहीं दिया? इसके अलावा, मनोवैज्ञानिक यह सुनिश्चित करते हैं कि सैनिक को टॉर्चर के कारण कोई मानसिक आघात (PTSD) तो नहीं पहुंचा। खुफिया एजेंसियां भी उनसे विस्तृत पूछताछ करती हैं ताकि यह पता चल सके कि दुश्मन ने कोई महत्वपूर्ण जानकारी तो नहीं निकलवा ली या कहीं ब्रेनवॉश तो नहीं किया गया।
दुश्मन की कैद से लौटने के बाद री-जॉइनिंग मिलना सैनिक की फिटनेस और खुफिया रिपोर्ट पर निर्भर करता है। यदि सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से 100% फिट पाया जाता है, तो उसे उसकी पुरानी रेजिमेंट में वापस भेजा जा सकता है। अभिनंदन वर्धमान इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जिन्हें फिट घोषित होने के बाद फिर से फाइटर जेट उड़ाने की अनुमति मिली थी।
अगर कोई सैनिक फील्ड ड्यूटी के लिए फिट नहीं होता, तो उसे सेना में बनाए रखने के लिए ट्रेनिंग सेंटर या प्रशासनिक विभाग में डेस्क जॉब दी जा सकती है। हालांकि, यदि जांच में यह सामने आए कि सैनिक ने दुश्मन के सामने आत्मसमर्पण किया या देशद्रोह किया है, तो कोर्ट मार्शल जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
सैनिक जब तक दुश्मन की कैद में रहता है, तब तक उसकी सैलरी और भत्ते बंद नहीं होते। यह राशि या तो उसके परिवार को दी जाती है या उसके बैंक खाते में जमा होती रहती है। यदि कोई सैनिक मेडिकल कारणों से सेवा जारी रखने में असमर्थ होता है, तो उसे पेंशन, चिकित्सा सुविधाएं और रिटायरमेंट के सभी सरकारी लाभ सम्मानपूर्वक दिए जाते हैं।
27 फरवरी 2019 को मिग-21 बाइसन से पाकिस्तान के F-16 को मार गिराने वाले अभिनंदन वर्धमान ने 60 घंटे दुश्मन की कैद में बिताए थे। रिहाई के बाद, अगस्त 2019 में उन्हें फाइटर जेट उड़ाने की फिटनेस क्लीयरेंस मिली। उनकी वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया। दिसंबर 2021 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोट किया गया। अब, 22 साल की सेवा के बाद वे एक नई पारी के लिए निजी एयरलाइन Fly91 से जुड़ गए हैं।
STORY | Former Indian Air Force Group Captain Abhinandan Varthaman joins regional airline FLY91 as pilot
— Press Trust of India (@PTI_News) September 3, 2026
Former Indian Air Force Group Captain and Vir Chakra awardee Abhinandan Varthaman has joined Goa-based regional airline FLY91 as a pilot, according to sources.
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