श्रीनगर की सड़कों पर सियासी जंग: बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के आमने-सामने आने से भारी बवाल
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श्रीनगर में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच का टकराव अब सड़कों पर आ गया है। सोमवार को लाल चौक से लेकर जहांगीर चौक तक बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया, जिससे शहर की फिजाओं में तनाव बढ़ गया।

बैरिकेड्स टूटे, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज दोनों पार्टियों के समर्थकों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता राजबाग स्थित बीजेपी दफ्तर की ओर बढ़ रहे थे, वहीं बीजेपी कार्यकर्ता लाल चौक से सचिवालय का घेराव करने निकले थे। तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस और सीआरपीएफ को बैरिकेड्स तोड़ने वाले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।

बीजेपी का उमर सरकार पर तीखा हमला बीजेपी ने उमर अब्दुल्ला सरकार को विफल करार देते हुए इस्तीफे की मांग की है। जम्मू-कश्मीर बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा और वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा नहीं किया, बल्कि बिजली दरें बढ़ाकर जनता पर बोझ डाला है। बीजेपी ने बैक डोर से की जा रही नियुक्तियों और भ्रष्टाचार को लेकर भी सरकार को घेरा।

NC ने मांगा राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 की वापसी और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए मोर्चा खोला। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। नासिर असलम वानी ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी को खुली छूट दी गई, जबकि NC के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए जगह-जगह पाबंदियां लगाई गईं।

बीजेपी का पलटवार: विपक्ष का ड्रामा बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरोध प्रदर्शन को जनता का ध्यान भटकाने वाला सियासी ड्रामा बताया। उन्होंने कहा कि NC खुद बैक डोर नियुक्तियों में शामिल है और प्रशासनिक बाधाओं का रोना रोकर अपनी नाकामियों को छुपा रही है। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल होगा, लेकिन यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव है।

बढ़ती खाई और आरोप-प्रत्यारोप इस दोहरे प्रदर्शन ने चुनाव के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बढ़ती तल्खी को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर बीजेपी ने भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दों को धार दी है, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संवैधानिक अधिकारों की बहाली को अपनी प्राथमिकता बताया है। फिलहाल, सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद दोनों पार्टियों के रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में यह सियासी घमासान और तेज होने वाला है।

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