नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा ने विकराल रूप ले लिया है। अब तक 1 हजार से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। तबाही के इस मंजर के बीच, नेपाल की सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भारतीय सेना राहत और बचाव अभियान (रेस्क्यू ऑपरेशन) को अंजाम दे रही है।
हाई-रिस्क ऑपरेशन: सुरंगों में फंसी है जिंदगी चिलिमे, लांगटांग और त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइटों पर हालात सबसे ज्यादा गंभीर बने हुए हैं। यहां की सुरंगों में मलबे का अंबार लगा है। बचाव कार्य में जुटी 24 सदस्यीय भारतीय टनल रेस्क्यू टीम दो यूनिटों में काम कर रही है। स्थिति इतनी खतरनाक है कि सुरंगों में मिट्टी इस तरह भरी है जैसे किसी ट्यूब में टूथपेस्ट भरा हो।
भारत पहुंचा रहा है हर संभव मदद नेपाल के पास शवों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर यूनिट्स और डीएनए टेस्टिंग किट्स की भारी कमी है। इसे देखते हुए भारत ने 18-19 फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों की एक विशेष टीम नेपाल भेजी है। इसके अलावा, भारत अब तक 68.5 टन से ज्यादा राहत सामग्री की चार खेप नेपाल पहुंचा चुका है, जिसमें बेली ब्रिज भी शामिल हैं।
नेपाल का भूगोल बना सबसे बड़ी बाधा रेस्क्यू ऑपरेशन में मुख्य समस्या नेपाल की भौगोलिक स्थिति है। रसुवा और नुवाकोट जैसे जिले संकरी घाटियों में बसे हैं, जहाँ की पहाड़ियां बेहद अस्थिर हैं और लगातार भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हो रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उतारने के लिए समतल जमीन मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है, क्योंकि हर जगह 10 से 15 फीट तक कीचड़ जमा है।
नो लैंडिंग जोन के बीच रस्सियों के सहारे रेस्क्यू ज्यादातर प्रभावित इलाके नो लैंडिंग जोन में तब्दील हो चुके हैं। पायलटों को हेलीकॉप्टर हवा में ही स्थिर रखने पड़ते हैं और जवान रस्सियों के सहारे नीचे उतरकर जान जोखिम में डाल रहे हैं। फिलहाल, 20 से ज्यादा हेलीकॉप्टर्स और 20 हजार जवान दिन-रात रेस्क्यू में जुटे हैं।
विनाश का आलम यह है कि स्थिति भयावह होती जा रही है; एक शव की पहचान के लिए तीन अलग-अलग परिवार दावा कर रहे हैं, जो आपदा की गंभीरता और मानवीय त्रासदी को दर्शाता है। ऑपरेशन के आठवें दिन भी मलबे के नीचे दबे लोगों को खोजने की जंग जारी है।
From the #Chilime Tunnel, as well as #Trishuli-1, Trishuli-A and Trishuli-B tunnels, people are yet to be rescued,modern equipment is urgently required to remove the muck, along with heavy excavation machines, to speed up the rescue operation.
— Manish Prasad (@manishindiatv) September 2, 2026
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