नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। रसुवा और नुवाकोट जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में तबाही का मंजर है। सड़कें नदियों में बह चुकी हैं और पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। ऐसे में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए सेना के हेलिकॉप्टर ही एकमात्र उम्मीद की किरण बचे हैं।
धुंचे आर्मी हेलीपैड से सामने आई ग्राउंड रिपोर्ट भयावह है। सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए लोग अपनी जान हथेली पर लेकर घंटों लाइन में खड़े हैं। यहां कड़ाके की धूप और ठंड के बीच लोगों को अपनी बारी के लिए 24 से 48 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर बिना रुके उड़ान भर रहे हैं, ताकि प्राथमिकता के आधार पर घायलों और फंसे हुए नागरिकों को काठमांडू सुरक्षित पहुंचाया जा सके।
बचाव अभियान के दौरान धुंचे हेलीपैड पर अफरा-तफरी का माहौल है। सेना ने एक व्यवस्थित प्रणाली अपनाई है, जहां पहले लोगों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है और उसके बाद ही उन्हें हेलिकॉप्टर में चढ़ने की अनुमति मिलती है। सड़क मार्ग पूरी तरह कट जाने के कारण, प्रभावित क्षेत्रों से निकलने का यह अकेला ज़रिया है, जिसके चलते हेलीपैड पर लोगों की लंबी कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
संकट केवल गांवों तक सीमित नहीं है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर पर स्थित 11 पनबिजली परियोजनाओं में हड़कंप मचा है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (IPPAN) के अनुसार, इन परियोजनाओं में काम करने वाले 897 लोगों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। चिलीमे हाइड्रोपावर टनल में भी करीब 30 लोगों के फंसे होने की आशंका है, जहां बचाव दल मलबे और कीचड़ के विशाल ढेर के बीच जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।
सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नेपाल सरकार के विशेष अनुरोध पर भारत और चीन से टनल विशेषज्ञ (टेक्नीशियन) पहुंचे हैं। ये विशेषज्ञ आधुनिक तकनीक की मदद से मलबे से पटी सुरंगों के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। रेस्क्यू टीम के लिए मलबे और पानी के बीच काम करना बेहद जोखिम भरा है।
इस त्रासदी की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन और चट्टानें खिसकने से हुई। इसके कारण आई भीषण बाढ़ ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज—घर, वाहन और बुनियादी ढांचे—को तबाह कर दिया। अब तक इस आपदा में एक हजार से अधिक लोगों के मारे जाने और हजारों के लापता होने की खबरें हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान फंसे हुए लोगों को निकालने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाने पर केंद्रित है।
Rescuers launched a daring helicopter operation at the Chilime Hydropower tunnel in Nepal’s Rasuwa district, where around 30 people are feared trapped. 🚨🇳🇵🏔️
— SG News (@SGNews123) September 1, 2026
Arriving in the early hours of Tuesday, September 1, emergency response teams faced enormous walls of mud and debris… pic.twitter.com/ruqO1Dj8XG
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