भ्रष्टाचार मेरा पीछा नहीं छोड़ता : IAS रिंकू सिंह राही ने सिस्टम के खिलाफ फिर छेड़ी जंग
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जालौन: अपनी कार्यशैली और बेबाक बयानों के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर चर्चा में हैं। उरई सदर में एसडीएम (न्यायिक) के पद पर तैनात राही ने इस बार कलेक्ट्रेट में वाहनों की आउटसोर्सिंग में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर मोर्चा खोला है।

क्या है मामला? रिंकू सिंह राही ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पत्र पोस्ट किया, जो श्रमायुक्त और परिवहन आयुक्त को लिखा गया है। राही का आरोप है कि कलेक्ट्रेट में आउटसोर्सिंग के जरिए जो गाड़ियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, उनमें बड़े स्तर पर धांधली हो रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा है।

आउटसोर्सिंग में धांधली का दावा राही ने अपने पत्र में लिखा कि टेंडर प्रक्रिया में चहेती फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर L-1 (सबसे कम बोली लगाने वाला) बनाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि गाड़ियों के नाम पर कागजों में खेल हो रहा है। इतना ही नहीं, जो गाड़ियां सरकारी काम के लिए दी गई हैं, उनमें पीली नंबर प्लेट (व्यावसायिक उपयोग के लिए अनिवार्य) तक नहीं है, जो परिवहन नियमों का सीधा उल्लंघन है।

चालकों का हो रहा शोषण आईएएस अधिकारी ने ड्राइवरों के दर्द को भी उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आउटसोर्सिंग फर्मों में ड्राइवरों का खुलेआम शोषण हो रहा है। मजदूरी के नाम पर उन्हें जो 6 हजार रुपये मिलने चाहिए, वह भी महीनों तक लंबित रखे जाते हैं। उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को मिलीभगत का परिणाम बताया है।

मैं भ्रष्टाचार रोक नहीं सकता, तो उजागर कर सकता हूं राही ने अपनी पोस्ट में लिखा, भ्रष्टाचार रोक नहीं सकता तो उजागर कर ऑन रिकॉर्ड ला ही सकता हूं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे टेंडर और अनुबंध प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। राही के मुताबिक, सरकारी सिस्टम में मानकों को केवल कागजी दिखावे के लिए रखा गया है।

लगातार सुर्खियों में हैं राही यह पहली बार नहीं है जब रिंकू सिंह राही ने सिस्टम के खिलाफ अपनी आवाज उठाई हो। इससे पहले भी वे सदर कोतवाल पर तहरीर न लेने का आरोप लगाकर पुलिस महानिदेशक को पत्र लिख चुके हैं। साथ ही, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने अपना कैडर बदलने तक की मांग की थी।

मुझे बर्बाद करने की कोशिश सोशल मीडिया पोस्ट में राही ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने लिखा कि जिले के उनके बॉस उन्हें बर्बाद करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं और उन्हें सरकार व राजनीतिक दल का घोर विरोधी साबित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अंत में एक शेर के जरिए अपने संघर्ष को बयां करते हुए लिखा, सब कुछ लुटाने की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।

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