मोदी का End of War संदेश: क्या पुतिन खोलेंगे सस्ते तेल का रास्ता? जानिए ग्रहों की चाल
News Image

बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्लादिमीर पुतिन से जो कहा, वह केवल कूटनीति नहीं, बल्कि कूटनीति के पीछे छुपे आर्थिक हितों का एक बड़ा संकेत है। Endless war को End of war में बदलने की अपील के पीछे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रहों का एक जटिल गणित काम कर रहा है।

भारत की कुंडली और युद्ध का कनेक्शन भारत की स्वतंत्रता कुंडली वृषभ लग्न की है, जिसमें वर्तमान में मंगल की महादशा चल रही है। मंगल सातवें (अंतरराष्ट्रीय संबंध) और बारहवें (आयात और विदेशी खर्च) भाव का स्वामी है। यह स्थिति सीधे तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध के आर्थिक प्रभावों—जैसे कच्चे तेल की महंगाई और रुपये की कमजोरी—से जुड़ी है। मोदी का बयान देश के खजाने को सुरक्षित रखने और महंगाई के दबाव को कम करने की एक दूरदर्शी कोशिश है।

राहु का खेल: अभी पूरी तस्वीर बाकी है 15 अगस्त 2026 से सक्रिय भारत के वर्षफल में सातवें भाव में राहु बैठा है। राहु का स्वभाव है चीजों को धुंधला रखना। यही कारण है कि मोदी-पुतिन की मुलाकात में शांति की बात तो हुई, लेकिन रूसी तेल की कीमतों या डिस्काउंट पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। यह संकेत है कि असली सौदेबाजी अभी परदे के पीछे चल रही है। भारत केवल तस्वीरों से संतुष्ट नहीं होगा, वह मॉस्को की शर्तों और चीन की बढ़ती सक्रियता पर बारीकी से नजर रखे हुए है।

क्या 9 से 19 सितंबर के बीच खुलेगा रास्ता? ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, भारत और रूस की कुंडलियां 9 से 19 सितंबर के बीच एक महत्वपूर्ण एनर्जी विंडो बना रही हैं। 12-13 सितंबर को भारत में होने वाला BRICS सम्मेलन इस दिशा में निर्णायक हो सकता है। गुरु और बुध का प्रभाव संकेत दे रहा है कि भारत केवल तेल नहीं, बल्कि भुगतान और शिपिंग की एक दीर्घकालिक व्यवस्था पर जोर देगा। हालांकि, रूस की कुंडली में शनि का प्रभाव यह भी बताता है कि वह कीमतों को लेकर सख्त रुख अपनाएगा।

चीन का पेंच और भारत की चुनौती पुतिन के सामने भारत अकेला खरीदार नहीं है; चीन भी रूसी तेल की होड़ में है। जहां पुतिन की कुंडली में शुक्र का प्रभाव उन्हें आर्थिक लाभ की ओर धकेलता है, वहीं भारत के लिए तेल मिलना लगभग तय है, लेकिन मनचाही छूट मिलना मुश्किल दिख रहा है।

निष्कर्ष मोदी का End of War का मंत्र शांति की अपील के साथ-साथ एक आर्थिक संतुलन भी है। युद्ध का थमना आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को स्थिर करने के लिए जरूरी है। बिश्केक में कहे गए शब्दों का असर 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाली बातचीत में दिखेगा। ग्रहों का संकेत यही है कि भारत को तेल की सुरक्षा तो मिलेगी, लेकिन उसके लिए रूस के साथ एक नई और कड़ी शर्तों वाली कूटनीति को अपनाना होगा।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

उज्जैन श्मशान में तांडव: जलती चिता के पास अघोरी महिला की करतूत पर FIR, मचा हड़कंप

Story 1

हवा में उड़ते हुए ग्लेन फिलिप्स का जादुई कैच, सुनील नरेन भी रह गए हैरान

Story 1

रणजी ट्रॉफी 2026-27: मुंबई की कमान संभालेंगे सिद्धेश लाड, सूर्यकुमार और शार्दुल छूटे पीछे

Story 1

दलीप ट्रॉफी में मोहम्मद शमी का तूफानी कमबैक: पंजों के साथ हैरतअंगेज कैच से बरपाया कहर

Story 1

अफगानिस्तान T20 सीरीज का बिगुल: श्रेयस अय्यर संभालेंगे कमान, 4 अनफिट खिलाड़ियों पर सस्पेंस

Story 1

नेपाल की भीषण बाढ़ में चमत्कार: चारों तरफ तबाही, पर अडिग खड़ा रहा हरा घर , परिवार ने सुनाई खौफनाक दास्तां

Story 1

SCO शिखर सम्मेलन: आतंकवाद से कनेक्टिविटी तक, पीएम मोदी के 10 कड़े संदेश

Story 1

₹13,999 का यह धाकड़ 5G फोन हुआ Out of Stock , पहली सेल में ही मची लूट

Story 1

यूपी में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट: अगले 48 घंटे रहें सावधान

Story 1

सीएम पद की दावेदारी और योगी से खींचतान पर केशव प्रसाद मौर्य की दो-टूक!