बिश्केक में बदला वैश्विक समीकरण: SCO समिट में मोदी का बैलेंसिंग एक्ट और अमेरिका की टेंशन
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किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। यह समिट सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र बन गया है। इस बार की थीम साझा शांति और विकास है, लेकिन चर्चाओं के केंद्र में भारत का कूटनीतिक कौशल है।

मोदी-पुतिन की मुलाकात: व्यापार और शांति की नई उम्मीद

शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता हुई। चर्चा का मुख्य केंद्र व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग रहा। पुतिन ने भारत-रूस के बढ़ते आर्थिक संबंधों की सराहना की। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संकट पर भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही युद्ध का समाधान संभव है।

चीन के साथ जमी बर्फ: क्या सीमा विवाद का होगा अंत?

पिछले कुछ हफ्तों में भारत और चीन के संबंधों में अप्रत्याशित नरमी देखी गई है। एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई हालिया बातचीत में 8-सूत्रीय सहमति बनी है। कजान और तियानजिन समिट के बाद मोदी-शी की मुलाकातों ने रिश्तों में स्थिरता लौटाने का काम किया है। पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करना दोनों देशों की प्राथमिकता में दिख रहा है।

अमेरिका की बेचैनी: टैरिफ और भारत का विकल्प

इस समिट की टाइमिंग अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए कड़े टैरिफ के बाद, भारत का रूस और चीन जैसे देशों के साथ एक मंच पर दिखना वॉशिंगटन को असहज कर रहा है। जानकारों का मानना है कि भारत अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहता, लेकिन यह बताना जरूर चाहता है कि दबाव की स्थिति में भारत के पास अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए विकल्प खुले हैं।

सुरक्षा और समृद्धि: भारत के लिए क्या हैं मायने?

भारत के लिए यह समिट दो स्तरों पर महत्वपूर्ण है:

  1. ऊर्जा और कृषि: रूस के साथ मजबूत संबंधों से भारत को सस्ती ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में स्थिरता मिलेगी, जो घरेलू महंगाई और किसानों के लिए जरूरी है।
  2. सीमा सुरक्षा: चीन के साथ तनाव कम होने से सैन्य खर्च का बोझ घटेगा और व्यापारिक निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, जो गलवान संघर्ष के बाद से ठप पड़े थे।

भारत का स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी मंत्र

कुल मिलाकर, बिश्केक समिट में भारत ने यह साबित किया है कि उसकी विदेश नीति किसी एक गुट पर आधारित नहीं है। साझा शांति की बात करते हुए भारत ने यह संदेश दिया है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वह रूस-चीन के साथ मंच साझा करने और अमेरिका के साथ कूटनीतिक दूरी बनाए रखने के बीच बारीक संतुलन बना सकता है।

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