गैंगस्टरों का नया डिजिटल हथियार: मोबाइल से सुपारी , स्नैपचैट से रची जा रही खौफनाक साजिशें
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हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान की हत्या ने देश में अपराध के बदलते स्वरूप को बेनकाब कर दिया है। अब बंदूक उठाने से पहले अपराधी मोबाइल का डिजिटल ट्रिगर दबाते हैं। शामली में हुई यह हत्या साबित करती है कि कैसे हजारों मील दूर बैठे गैंगस्टर सोशल मीडिया के जरिए भारत में खून-खराबा करवा रहे हैं।

कनाडा में बैठकर रची किलिंग स्क्रिप्ट

अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में पुलिस को चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। हत्या की पूरी साजिश टोरंटो (कनाडा) में बैठे गैंगस्टर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया ने रची थी। वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा है। शूटरों को निर्देश देने से लेकर हमले की टाइमिंग तय करने तक, उसने सब कुछ सोशल मीडिया के जरिए मैनेज किया।

गायब होते मैसेज और स्नैपचैट का जाल

पुलिस के मुताबिक, शूटरों को निर्देश देने के लिए स्नैपचैट (Snapchat) का इस्तेमाल किया गया। इस ऐप की खूबी यह है कि मैसेज पढ़ते ही खुद-ब-खुद डिलीट हो जाते हैं। गैंगस्टर्स को लगता है कि इससे कोई सबूत पीछे नहीं बचेगा और पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंच पाएगी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अंकित पर 20 राउंड गोलियां बरसाईं।

सिर्फ स्नैपचैट ही नहीं, ये ऐप्स भी हैं पसंद

साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, अपराधी एक खास पैटर्न पर काम कर रहे हैं। वे अपनी बातचीत के लिए अलग-अलग ऐप्स का सहारा लेते हैं:

एनकाउंटर में खत्म हुए शूटर

शामली पुलिस और यूपी एसटीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंकित बालियान के दो मुख्य शूटरों, सुमित और मोहित को एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। ये दोनों सोनीपत के रहने वाले थे। हालांकि, दो अन्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

क्या वाकई कोई सुबूत नहीं बचता?

गैंगस्टर्स की यह सोच एक बड़ी गलतफहमी है। डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि फोन जब्त होने के बाद डिलीट किए गए मैसेज, स्क्रीनशॉट और बैकअप फाइलें आसानी से रिकवर की जा सकती हैं। इसके अलावा, मैसेज किस आईपी एड्रेस या वाईफाई नेटवर्क से भेजा गया, इसका पता लगाकर पुलिस सटीक जगह तक पहुंच जाती है।

दहशत की मार्केटिंग बन रही है मुसीबत

हत्या के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का चलन गैंगस्टर्स के लिए दोधारी तलवार बन गया है। वे अपनी दहशत फैलाने के लिए पोस्ट तो करते हैं, लेकिन यही पोस्ट पुलिस को उनका नेटवर्क और मकसद समझने का पहला सुराग दे देती है। अंकित केस में भी इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए ही पुलिस भोलू शाहपुरिया तक पहुंचने में सफल रही।

निष्कर्ष: तकनीक अपराधियों के लिए रास्ता तो आसान कर रही है, लेकिन यही तकनीक उनके पकड़े जाने का सबसे बड़ा कारण भी बन रही है। डिजिटल फॉरेंसिक और मुखबिर तंत्र के तालमेल के आगे अब गैंगस्टर्स का डिजिटल कवर बहुत कमजोर साबित हो रहा है।

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