खेल हो या आम ज़िंदगी, जब कुछ अप्रत्याशित घटित होता है तो बरसों पुरानी कहावत याद आती है— सौ सुनार की तो एक लोहार की। दिलीप ट्रॉफी के अपने डेब्यू मैच में जल्दी आउट होने के बाद वैभव सूर्यवंशी के रेड बॉल टेंपरामेंट पर सवाल उठाने वालों को अब शायद अपने शब्दों पर पछतावा हो रहा होगा।
सेंट्रल ज़ोन के खिलाफ सेमीफाइनल में इस युवा खिलाड़ी ने 81 गेंदों में 92 रनों की तूफानी पारी खेलकर हर आलोचक का मुंह बंद कर दिया है। इसी के साथ उन्होंने दिलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है।
वैभव सूर्यवंशी को जब दिलीप ट्रॉफी में मौका मिला, तो क्रिकेट के जानकारों ने उनकी अति-आक्रामक शैली पर सवाल खड़े कर दिए थे। महज 8 रन बनाकर आउट होने के बाद, सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक उन्हें केवल टी20 फॉर्मेट का खिलाड़ी करार दिया जा रहा था। रेड बॉल क्रिकेट में खेलने के उनके फैसले को ही कई लोग गलत बता रहे थे। लेकिन क्या कभी किसी खिलाड़ी की काबिलियत महज एक पारी से तय की जा सकती है?
बंगलौर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की कठिन पिच पर जहां दिग्गजों को रन बनाने के लिए जूझना पड़ रहा था, वहीं वैभव ने 7 चौके और 7 छक्कों के साथ 92 रन बनाए। उनकी बल्लेबाजी ने बरसों बाद वीरेंद्र सहवाग की याद ताजा कर दी।
सहवाग की तरह ही वैभव को भी माइलस्टोन की परवाह नहीं है। शतक से महज 8 रन दूर होने के बावजूद, उन्होंने अपना आक्रामक रुख नहीं बदला और बड़े शॉट के प्रयास में बाउंड्री पर कैच आउट हुए। यह उनकी बेखौफ मानसिकता को दर्शाता है।
सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, सेमीफाइनल में कप्तानी की जिम्मेदारी मिलने पर वैभव ने परिपक्वता दिखाई। नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने के बाद, महज 15 साल की उम्र में उन्होंने जिस सूझबूझ के साथ फील्डिंग सजाई और गेंदबाजी रोटेट की, उसने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। DRS लेने से लेकर गेंदबाजों को प्रेरित करने तक, उन्होंने एक मंझे हुए कप्तान जैसी छाप छोड़ी।
वैभव केवल एक विस्फोटक बल्लेबाज नहीं हैं। नॉर्थ ईस्ट ज़ोन के खिलाफ उन्होंने साबित किया कि वे एक विकेट-टेकर गेंदबाज भी हैं। तीन ओवर में 11 रन देकर दो विकेट झटककर उन्होंने दिखाया कि वे टीम के लिए हर परिस्थिति में उपयोगी हैं।
राहुल द्रविड़ और रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गजों ने भी सलाह दी है कि इस युवा खिलाड़ी को लेकर जल्दबाजी न की जाए। उन्हें अपनी प्रतिभा को और निखारने के लिए पर्याप्त समय देने की जरूरत है। 2026 उनके लिए एक जादुई साल रहा है—अंडर-19 वर्ल्ड कप की कामयाबी से लेकर आईपीएल में ऑरेंज कैप और जिम्बाब्वे दौरे पर प्लेयर ऑफ द सीरीज बनने तक, उन्होंने खुद को साबित किया है।
वैभव सूर्यवंशी का सफर अभी शुरू हुआ है। उनकी तकनीकी क्षमता और दबाव झेलने का हुनर बताता है कि भारतीय क्रिकेट को आने वाले समय का अगला बड़ा सुपरस्टार मिल चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आगे की चुनौतियों को किस अंदाज में पार करते हैं।
Vaibhav Sooryavanshi & 90s Dismissals
— 𝑺𝒉𝒆𝒃𝒂𝒔 (@Shebas_10dulkar) August 31, 2026
A Never-Ending Story!
Today, he was dismissed for 92 in the Duleep Trophy Semifinal (He had a chance to become the youngest-ever centurion in Duleep Trophy history)#DuleepTrophy pic.twitter.com/s8dS2urXO2
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