राजस्थान हाई कोर्ट में सोमवार को न्यायिक इतिहास का एक अभूतपूर्व और उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। हाई कोर्ट के वकीलों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ न केवल हड़ताल की, बल्कि मुख्यालय में धरना देकर अपनी नाराजगी जाहिर की। जयपुर और जोधपुर, दोनों पीठों के वकीलों ने लामबंद होकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
वकीलों का आरोप: प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग वकीलों का मुख्य आक्रोश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर है। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का आरोप है कि हाई कोर्ट में प्रशासनिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। वकीलों की सबसे बड़ी शिकायत मुकदमों की सूची (Listing of cases) तैयार करने में बरती जा रही कथित मनमानी को लेकर है। उनका दावा है कि मामलों को अलग-अलग पीठों के सामने भेजने में नियमों को ताक पर रखा गया है।
अक्रामक प्रदर्शन और नारों की गूँज इस विरोध प्रदर्शन के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वकील गली-गली में शोर है, हमारा मुखिया चोर है जैसे नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी वकीलों ने कोर्ट के गलियारों में अपनी फाइलों के साथ बैठकर काम बंद रखा, जिससे दिन भर की न्यायिक कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित रही। इस आक्रामक तेवर को न्यायपालिका में हो रहे हालिया आंदोलनों के नए दौर के रूप में देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुकी है आंच यह विवाद केवल वकीलों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर सवाल उठाए थे। जस्टिस मेहता ने न केवल मुकदमों की लिस्टिंग में दखल का आरोप लगाया, बल्कि प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग की बात कहते हुए किसी दूसरे राज्य से मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह भी किया था।
क्या है CJI का रुख? मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इन चिंताओं का संज्ञान ले लिया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि किसी भी न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर निर्णय सड़कों पर नहीं, बल्कि न्यायपालिका की स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाएगा। कॉलेजियम अन्य हाई कोर्ट्स में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी काम कर रहा है।
गंभीर होता संकट राजस्थान हाई कोर्ट का यह संकट अब दो मोर्चों पर खड़ा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट स्तर पर प्रशासनिक सुधारों की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर वकीलों का गुस्सा न्यायिक व्यवस्था को ठप कर रहा है। न्यायपालिका की मर्यादा और वकीलों का यह आक्रामक आंदोलन आने वाले समय में राजस्थान हाई कोर्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
*Rajasthan High Court advocates conduct a sit in dharna against the Acting CJ. It’s unprecedented the kind of language being used. GenZ andolan effect? 🤨 pic.twitter.com/oJswYQ2P9x
— sanjoy ghose (@advsanjoy) August 31, 2026
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