किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुई मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। युद्ध की विभीषिका के बीच हुई यह पहली आमने-सामने की बैठक रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दोस्ती को और मजबूती : पीएम मोदी की प्रतिबद्धता बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के साथ भारत के पुराने संबंधों को विभिन्न क्षेत्रों में और अधिक प्रगाढ़ बनाने का संकल्प दोहराया है। पीएम ने स्पष्ट किया कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ अपने व्यापारिक दायरे को न केवल बढ़ाना चाहता है, बल्कि उसमें विविधता भी लाना चाहता है।
पश्चिम एशिया का तनाव और कूटनीतिक चर्चा भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के अलावा पश्चिम एशिया के वर्तमान हालात पर गहन चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए की जा रही सभी कोशिशों का सक्रिय रूप से समर्थन करेगा। ईरानी दूतावास ने भी इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण चरण बताया है।
क्यों अहम है यह बैठक? विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को संकट में डाल दिया है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मुख्य द्वार है। तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई का खतरा भारत की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति को बिना किसी रुकावट के जारी रखना भारत की प्राथमिकता है।
800 भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा वर्तमान संघर्ष में लगभग 800 भारतीय नाविकों के साथ 28 जहाज हॉर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं। इन नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी के लिए तेहरान के साथ सीधी राजनयिक बातचीत अत्यंत आवश्यक थी। भारत का ध्यान अपने कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने पर भी केंद्रित है।
वैकल्पिक रास्ते की तलाश और INSTC लाल सागर और अन्य समुद्री मार्गों में तनाव के कारण भारत अब इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर तेजी से काम करना चाहता है। 7,200 किमी लंबा यह कॉरिडोर मुंबई को ईरान के रास्ते सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ता है। यह नेटवर्क न केवल भीड़भाड़ वाले जलमार्गों का विकल्प है, बल्कि भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूती देने का एक बड़ा जरिया भी है।
निष्कर्ष: निष्पक्ष आवाज की भूमिका इस संकट के समय में भारत अपनी निष्पक्ष आवाज की भूमिका निभा रहा है। पीएम मोदी की यह मुलाकात ईरान से फ्री नेविगेशन (मुक्त आवागमन) की मांग करने और संघर्ष को कूटनीति के जरिए सुलझाने की वकालत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। स्पष्ट है कि भारत अपने आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी मोर्चे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।
Met President Masoud Pezeshkian in Bishkek. Reiterated our commitment to strengthening India’s long standing friendship with Iran across diverse sectors. We want to expand and diversify our trade basket in the times to come.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2026
We had a discussion on the prevailing situation in… pic.twitter.com/qagQy5o108
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