उत्तर प्रदेश में अगस्त का अंतिम सप्ताह तबाही का संदेश लेकर आया है। राज्य के पूर्वी हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगा और यमुना का बढ़ता जलस्तर अब शहरों की सड़कों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है, जिससे प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इसका मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) है। यह मौसमी सिस्टम ओड़िशा के पास सक्रिय है, जिसके कारण नमी का स्तर बढ़ गया है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के ऊपर बनी ट्रफ लाइन लगातार बारिश को बढ़ावा दे रही है, जिससे नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर आ रहा है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर हो गई है। संगम क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी भर गया है और प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर परिसर तक गंगा का जल प्रवेश कर चुका है। वहीं, वाराणसी में स्थिति और भी तनावपूर्ण है; पिछले 30 घंटों में गंगा का जलस्तर 1.26 मीटर से अधिक बढ़ चुका है, जो चेतावनी स्तर के काफी करीब है। घाटों पर जलभराव के कारण नाव संचालन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने कहर बरपाया है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों के सैकड़ों घर पानी में डूब गए हैं। प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों के लिए युद्धस्तर पर काम करना पड़ रहा है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि राहत की उम्मीद फिलहाल कम है। 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। साथ ही, आंधी-तूफान और बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है। IMD के अनुसार, 2 से 6 सितंबर तक भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
बाढ़ के खतरे के पीछे केवल स्थानीय बारिश ही नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऊपरी क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) से आने वाला पानी और नदियों का पहले से बढ़ा हुआ प्रवाह स्थिति को और जटिल बना रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे राज्य के एक बड़े हिस्से में जलभराव का खतरा बना हुआ है।
सवाल: यूपी में बाढ़ का मुख्य कारण क्या है? जवाब: बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो रही है, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।
सवाल: अगले 48 घंटे क्यों अहम हैं? जवाब: IMD ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिससे नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा बढ़ सकता है।
सवाल: क्या 1 सितंबर के बाद स्थिति सामान्य होगी? जवाब: नहीं, IMD का अनुमान है कि 6 सितंबर तक पूर्वी यूपी में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
सवाल: वाराणसी में गंगा की स्थिति क्या है? जवाब: गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया है और पिछले 30 घंटों में इसमें 1.26 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सवाल: प्रशासन की क्या सलाह है? जवाब: नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी अलर्ट का लगातार पालन करने की सलाह दी गई है।
*#WATCH | Prayagraj, Uttar Pradesh: The flood situation intensifies as the water levels of the Ganga and Yamuna rivers continue to rise rapidly due to persistent rainfall in the region. pic.twitter.com/CQytQlUvGo
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 31, 2026
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