छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल: RTI के जवाब में CRPF ने साधी चुप्पी, मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से किया इनकार
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नई दिल्ली: नीट परीक्षा में धांधली के खिलाफ 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

RTI से ब्योरा मांगने पर इनकार तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के तहत आने वाली रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) से प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों का ब्योरा मांगा था। गोखले ने आरटीआई के जरिए एम्युनिशन लॉग और तैनाती की जानकारी मांगी थी। हालांकि, सीआरपीएफ ने आरटीआई एक्ट की धारा 24(1) का हवाला देते हुए जानकारी देने से साफ मना कर दिया है।

मानवाधिकार उल्लंघन का दावा साकेत गोखले ने सुरक्षा बलों पर निहत्थे छात्रों पर अंधाधुंध प्लास्टिक और मैटेलिक पेलेट्स चलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई छात्र बुरी तरह घायल हुए और एक छात्र की तो दाहिनी आंख की रोशनी जाने का खतरा पैदा हो गया है। गोखले का कहना है कि यह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।

CRPF का तर्क और गोखले का पलटवार सीआरपीएफ का जवाब है कि वे सूचना देने के लिए बाध्य नहीं हैं, क्योंकि उनके अनुसार यह मामला धारा 24(1) के तहत मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में नहीं आता। वहीं, गोखले ने इस तर्क को खारिज किया है। उनका कहना है कि नागरिकों पर पैलेट गन चलाना, जिससे स्थायी विकलांगता का खतरा हो, सीधे तौर पर मानवाधिकारों का मामला है और सुरक्षा बलों को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

क्या है पीड़ित छात्र का मामला? इस घटना में घायल एक छात्र के शरीर पर छर्रों के करीब 200 घाव पाए गए हैं, जिनमें से तीन घाव उसकी आंखों पर हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वयं इस मामले को उठाया था और पीड़ित को पुलिस स्टेशन ले जाकर एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस ने मामले में केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर अब भी चुप्पी बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने गठित की जांच समिति विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग की शिकायतों के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह पैनल इस बात की जांच करेगा कि छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल क्यों किया गया और क्या सुरक्षा बलों की कार्रवाई नियमों के दायरे में थी या नहीं।

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