उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान और ताशकंद से दिल्ली तक नई कूटनीतिक धमक: क्या मध्य एशिया में बदल रहे हैं समीकरण?
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ताशकंद: मध्य एशिया की भू-राजनीति में भारत का प्रभाव एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ने न केवल दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को प्रगाढ़ किया है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को भी रेखांकित किया है।

ओली दाराजली दोस्लिक : मित्रता का सर्वोच्च प्रतीक राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ओली दाराजली दोस्लिक (उच्च स्तरीय मित्रता) से नवाजा। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि उज्बेकिस्तान भारत को अपने सबसे विश्वसनीय रणनीतिक साझेदारों में गिनता है। दिलचस्प बात यह है कि यह मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, जिसमें 11 मुस्लिम-बहुसंख्यक देशों के सर्वोच्च पुरस्कार शामिल हैं।

ऊर्जा सुरक्षा: यूरेनियम के लिए बड़ा करार ताशकंद में हुई द्विपक्षीय वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारत की ऊर्जा सुरक्षा रहा। दोनों देशों ने दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। भारत के लिए यह समझौता इसलिए खास है क्योंकि यह परमाणु ऊर्जा की जरूरतों के लिए आपूर्ति के दायरे को व्यापक और अधिक भरोसेमंद बनाता है।

रणनीतिक साझेदारी और जीआईएफटी सिटी मॉडल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर पहुंच गए हैं। इस साझेदारी को धरातल पर उतारने के लिए विदेश मंत्री स्तर पर एक समन्वय परिषद (Coordination Council) का गठन किया गया है। इसके अलावा, उज्बेकिस्तान के न्यू ताशकंद शहर के निर्माण में भारत की GIFT सिटी का मॉडल एक बेंचमार्क बनेगा, जो शहरी विकास और बुनियादी ढांचे में भारत की विशेषज्ञता को दर्शाता है।

डिजिटल और आर्थिक कनेक्टिविटी का नया लक्ष्य दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को नई गति देने के लिए 3 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, डिजिटल इंडिया के प्रभाव को विस्तार देते हुए यूपीआई (UPI) को जोड़ने की दिशा में काम शुरू हो गया है, जिससे भविष्य में सीमा पार व्यापार और भुगतान प्रणाली अत्यधिक सरल हो जाएगी।

क्या बीजिंग और मॉस्को के लिए है कोई संकेत? ताशकंद का यह दौरा केवल दो देशों का मिलन नहीं है, बल्कि मध्य एशिया में भारत की सक्रिय भागीदारी का एक बड़ा संकेत है। सिस्टर सिटी और सिस्टर स्टेट समझौतों के जरिए लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना यह दर्शाता है कि भारत अब इस क्षेत्र में दीर्घकालिक और बहुआयामी निवेश की नीति पर चल रहा है।

यह यात्रा स्पष्ट करती है कि मध्य एशिया में भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी जगह पक्की कर रहा है। आने वाले समय में, यह कूटनीतिक हलचल पूरे एशिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली साबित हो सकती है।

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