सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रांची के अरगोड़ा चौक पर एक युवक बड़ी तन्मयता से ग्राहकों को सब्जी तौल रहा है। आम दिखने वाले इस सब्जी विक्रेता का नाम अमरदीप कुमार है, लेकिन उनकी कहानी किसी साधारण दुकानदार जैसी कतई नहीं है।
मेडल के पीछे छिपा संघर्ष वीडियो की सबसे हैरान करने वाली बात अमरदीप के पीछे टंगे वे मेडल हैं, जो उनकी गौरवशाली उपलब्धियों की गवाही देते हैं। अमरदीप कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले थ्रोबॉल खिलाड़ी हैं। उन्होंने न केवल देश का प्रतिनिधित्व किया है, बल्कि मलेशिया जैसे देशों में भारत की झोली में गोल्ड मेडल भी डाले हैं।
खेल की चमक और रोटी की तलाश 10वीं कक्षा से थ्रोबॉल की शुरुआत करने वाले अमरदीप ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकलकर अंतरराष्ट्रीय फलक तक का सफर तय किया। उन्होंने चार बार विदेश यात्राएं कीं और तिरंगा लहराया। लेकिन आज, उन्हीं हाथों में खेल के मैदान का बॉल नहीं, बल्कि धनिया और मिर्च की तराजू है। परिवार का पेट पालने के लिए वह अपने पिता की सब्जी की दुकान पर काम करने को मजबूर हैं।
छह साल बाद भी बदहाल स्थिति यह पहली बार नहीं है जब अमरदीप की यह शर्मनाक स्थिति सामने आई है। साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान भी उनकी सब्जी बेचते हुए तस्वीरें वायरल हुई थीं। छह साल बीत जाने के बाद भी उनकी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। अमरदीप ने खेल कोटे के तहत कई बार सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किए, लेकिन हर बार उन्हें मायूसी ही हाथ लगी।
खिलाड़ियों के भविष्य पर बड़ा सवाल अमरदीप का यह मामला एक बार फिर खेल तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित नहीं है, तो युवा खेल की ओर प्रेरित कैसे होंगे? क्या सरकार के पास पदक विजेताओं के लिए करियर सुरक्षा की कोई पुख्ता योजना नहीं है? अमरदीप का संघर्ष हर उस खिलाड़ी की पीड़ा है, जो खेल की दुनिया में तो चमकता है, लेकिन हकीकत की दुनिया में गुमनाम होकर गुम हो जाता है।
*नाम : अमरदीप कुमार।
— Arvind Sharma (@sarviind) August 30, 2026
उपलब्धि : 4 बार विदेश यात्रा। भारत की जर्सी पहनी। मलेशिया में थ्रोबॉल में गोल्ड जीतकर तिरंगा लहराया।
आज : झारखंड में अमरदीप रांची के अरगोड़ा चौक पर धनिया-मिर्च तौल रहा है। pic.twitter.com/kny1BvxtD4
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