बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक महिला कांस्टेबल की मौत ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। लालगंज थाने में तैनात 30 वर्षीय आरक्षी केशरी वर्मा की असमय मौत के बाद उनके पति ने जो आरोप लगाए हैं, वे विभाग के भीतर कर्मचारियों की चिकित्सीय जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता की पोल खोलते हैं।
2018 बैच की आरक्षी केशरी वर्मा दिसंबर 2025 से लालगंज थाने में तैनात थीं। परिवार के अनुसार, 22 अगस्त को सड़क हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। प्रतापगढ़ में उपचार के दौरान उनके सिर में चार टांके लगाए गए थे और सीटी स्कैन हुआ था। चोट गंभीर होने के बावजूद, उन्हें स्वास्थ्य लाभ के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला और वे ड्यूटी पर लौटने को मजबूर हुईं।
केशरी के पति और साथी सिपाही नागेंद्र वर्मा का आरोप है कि चोट के बाद भी पत्नी को लगातार दर्द बना हुआ था। उन्होंने इलाज के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार छुट्टी मांगी, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नागेंद्र ने एसपी कार्यालय के दो कर्मचारियों पर विशेष रूप से छुट्टी रोकने का आरोप लगाया है। पति का कहना है कि यदि समय पर छुट्टी मिल जाती और सही इलाज हो पाता, तो आज उनकी पत्नी उनके साथ होतीं।
शनिवार तड़के जब नागेंद्र ड्यूटी से घर लौटे, तो केशरी की हालत काफी नाजुक थी। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर अपनी पत्नी के शव को देख नागेंद्र का सब्र टूट गया। वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ते हुए उन्होंने न्याय की गुहार लगाई और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि केशरी वर्मा की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी। पुलिस का तर्क है कि हादसे के बाद प्राथमिक इलाज के दौरान रिपोर्ट में कोई बड़ी समस्या नहीं आई थी, इसलिए उन्हें ड्यूटी पर तैनात रखा गया। फिलहाल, छुट्टी न मिलने के आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है।
क्या यह केवल एक चिकित्सकीय लापरवाही थी या फिर पुलिस महकमे के सिस्टम की बेरहमी? इस सवाल का जवाब अब विभागीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलने वाली पुष्टि पर टिका है। फिलहाल, इस घटना ने पुलिसकर्मियों के लिए कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और अवकाश संबंधी नीतियों की समीक्षा की मांग तेज कर दी है।
*ये सिर्फ मौत नहीं, सिस्टम की बेरहमी है।बस्ती की महिला सिपाही केसरी वर्मा (30) हादसे में सिर फटने के बाद भी ड्यूटी पर झोंक दी गईं। 4 टांके लगे थे, दर्द सह रही थीं, इलाज के लिए छुट्टी मांगी—मिली नहीं।पति नागेंद्र वर्मा फूट-फूटकर रो रहा है: छुट्टी मिल जाती तो मेरी पत्नी आज जिंदा… pic.twitter.com/SHqwyjq0OK
— ekkadam (@ekkadam260772) August 29, 2026
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