रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में उन कूटनीतिक सवालों को खारिज कर दिया जिनमें रूस की दोस्ती को पैरिया स्टेट्स (अलग-थलग पड़े देशों) के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। एक साक्षात्कार के दौरान जब उनसे पूछा गया कि मॉस्को कैसे इन देशों का करीबी बन गया, तो लावरोव ने पलटकर पूछा, ऐसी संगत में खराबी क्या है?
लावरोव ने कहा कि ईरान और उत्तर कोरिया को अलग-थलग केवल उन लोगों ने माना है जो शीत युद्ध के खुद को विजेता समझते थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस अब उन पश्चिमी मानकों को नहीं मानता जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अच्छे और बुरे देशों का वर्गीकरण करते हैं। उनका यह बयान यूक्रेन युद्ध के बाद बदली हुई रूसी कूटनीति का आईना है।
यूक्रेन युद्ध ने मॉस्को और प्योंगयांग के रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। उत्तर कोरिया ने रूस को भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार मुहैया कराए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हजारों उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में युद्ध में हिस्सा लिया है। जून 2024 में पुतिन और किम जोंग उन के बीच हुई रणनीतिक संधि ने इस सैन्य सहयोग को औपचारिक रक्षा कवच प्रदान कर दिया है।
ईरान की भूमिका मुख्य रूप से रूस को शाहेद ड्रोन उपलब्ध कराने में रही है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुआ। हालांकि, अब यह रिश्ता सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं है। जनवरी 2025 में दोनों देशों ने 20 साल की एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सैन्य, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को प्राथमिकता दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के इन दोनों देशों के साथ रिश्ते एक जैसे नहीं हैं। उत्तर कोरिया के साथ रूस का समझौता आपसी रक्षा की बाध्यकारी प्रतिबद्धता रखता है, जो इसे एक मजबूत सैन्य संधि बनाता है। इसके विपरीत, ईरान के साथ हुई संधि में सुरक्षा सहयोग तो है, लेकिन उस स्तर की पारस्परिक रक्षा गारंटी शामिल नहीं है।
लावरोव का यह रुख स्पष्ट करता है कि मॉस्को अब पश्चिमी देशों के दबाव की परवाह किए बिना अपने नए रणनीतिक नेटवर्क को मजबूत कर रहा है। रूस के लिए ईरान और उत्तर कोरिया सिर्फ कूटनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि पश्चिमी प्रतिबंधों के दौर में सैन्य और आर्थिक अस्तित्व बनाए रखने के सबसे भरोसेमंद स्तंभ बन गए हैं। मॉस्को इसे कमजोरी के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के रूप में पेश कर रहा है।
RT wartranslated A Russian journalist asked Lavrov how Russia ended up with only North Korea and Iran as allies. Lavrov s response: What s wrong with that company? pic.twitter.com/slUeMNvyH8
— GMan | GMan’s Chronicle (@FAB87F) August 30, 2026
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