नेपाल बाढ़: चाय के ब्रेक ने बचाई 28 यात्रियों की जान, मौत को 10 मिनट से दिया चकमा
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नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर पेश किया है जिसे देख पूरी दुनिया दंग है। इस आपदा में अब तक 734 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस त्रासदी के बीच 28 भारतीय तीर्थयात्रियों की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।

चाय के ब्रेक ने खोला मौत के दरवाजे से वापसी का रास्ता दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से आए 28 तीर्थयात्रियों का यह दल कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर था। यात्रा का नेतृत्व कर रहे साइन इन ट्रैवल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर पेम्मासानी वेंकटरमना ने बताया कि स्याब्रूबेसी गांव की ओर बढ़ते समय उनका दल चाय पीने के लिए रुका।

इस 10 मिनट के चाय ब्रेक में हुई देरी ने उनकी किस्मत बदल दी। जैसे ही वे आगे बढ़े, ड्राइवर ने हालात की गंभीरता भांप ली और गाड़ी मोड़ ली। ठीक 10 मिनट बाद, जिस स्याब्रूबेसी पुल से उन्हें गुजरना था, वह उफनती नदी की भेंट चढ़ गया।

वीजा में देरी बनी वरदान विशाखापत्तनम के कृष्णैया मुथ्याला ने बताया कि केवल चाय का ब्रेक ही नहीं, बल्कि यात्रा शुरू होने से पहले वीजा में हुई 3 दिन की देरी भी उनके लिए जीवनदान साबित हुई। यदि वीजा समय पर मिल जाता, तो वे उसी वक्त पुल पर होते जब वह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस देरी ने उन्हें निश्चित मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।

हिमालय में कुदरत का कहर नेपाल सरकार के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर फटने के कारण घाटी में जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। नुवाकोट जिले में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और सोलर प्लांट भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे क्षेत्र में भारी आर्थिक और बुनियादी ढांचे का नुकसान हुआ है।

भारत का ऑपरेशन राहत जारी इस संकट की घड़ी में भारत ने पड़ोसी देश नेपाल के साथ मजबूती से खड़े होने का फैसला किया है। अब तक भारत की ओर से राहत सामग्री और तकनीकी सहायता लेकर काठमांडू के लिए चौथी उड़ान पहुंच चुकी है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पुष्टि की है कि भारत निरंतर नेपाल में खोज और बचाव अभियान में मदद कर रहा है। शनिवार को 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी काठमांडू पहुंच चुकी है, जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में जुटी है।

कैलाश मानसरोवर से लौटे इन 28 यात्रियों की आपबीती यह याद दिलाती है कि जीवन कई बार महज कुछ मिनटों के फासले पर टिका होता है। फिलहाल, नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल लापता लोगों की तलाश में दिन-रात जुटे हुए हैं।

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