पानी पर दौड़कर आसमान छुएगा यूरेका , कार्गो डिलीवरी की दुनिया में आएगा बड़ा बदलाव
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दुनियाभर में माल ढुलाई (Global Trade) के लिए दो ही रास्ते हैं—समुद्र या हवा। समुद्र के जरिए माल भेजने में हफ्तों लग जाते हैं, वहीं हवाई मार्ग से यह काम बेहद महंगा पड़ता है। बेंगलुरु के डीप-टेक स्टार्टअप एस्पेरा इंडस्ट्रीज ने इस समस्या का एक क्रांतिकारी समाधान निकाला है।

क्या है यूरेका ?

एस्पेरा इंडस्ट्रीज ने यूरेका नाम का एक ऐसा सीप्लेन विकसित किया है, जो पानी को ही अपना रनवे बनाता है। यह विमान पानी से ही उड़ान भरेगा और पानी पर ही सुरक्षित लैंड करेगा। यह तकनीक न केवल समय बचाएगी, बल्कि कार्गो डिलीवरी के खर्च को भी बेहद कम कर देगी।

कम लागत, ज्यादा फायदा

कंपनी का लक्ष्य कार्गो ढुलाई की लागत को 1 डॉलर प्रति टन-किलोमीटर से भी कम रखना है। जैसे-जैसे इनका बेड़ा बढ़ेगा, यह खर्च घटकर 50 सेंट (लगभग 40 रुपये) प्रति टन-किलोमीटर से भी कम हो सकता है। यह दवाइयों, खराब होने वाली वस्तुओं और कीमती सामानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।

रनवे की जरूरत खत्म

दुनिया के 193 में से 150 देशों के पास समुद्री तट मौजूद हैं। ज्यादातर बड़े औद्योगिक शहर भी जलाशयों के किनारे बसे हैं। एस्पेरा की सीईओ खुशी मित्तल के अनुसार, यूरेका को किसी हवाई अड्डे या महंगे बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं है। यह सीधे पानी से उड़ान भरने में सक्षम है, जिससे लॉजिस्टिक्स में आने वाला अतिरिक्त खर्च खत्म हो जाएगा।

1 टन वजन, 2000 किलोमीटर का सफर

अपनी छोटी बनावट के बावजूद यूरेका काफी शक्तिशाली है। यह विमान 6,500 फीट की ऊंचाई पर 1,000 किलोग्राम (1 टन) वजन लेकर 2,000 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकता है। इसके जरिए धरती के 71 प्रतिशत हिस्से तक बिना किसी रनवे के सीधी पहुंच सुनिश्चित होगी।

पुरानी खामी का नया समाधान

1950 के दशक में सीप्लेन का चलन था, लेकिन उनके भारी हुल (Hull) के कारण हवा में घर्षण (Drag) अधिक होता था, जिससे ईंधन की खपत बढ़ जाती थी। यूरेका ने इस समस्या को आधुनिक हाइड्रोफॉयल तकनीक से हल किया है। उड़ान भरने के बाद इसके हुल विमान के अंदर सिमट जाते हैं, जिससे हवा में इसे कोई रुकावट महसूस नहीं होती और ईंधन की बचत होती है।

यह तकनीक भविष्य में ग्लोबल सप्लाई चेन को तेज, सस्ता और अधिक सुलभ बनाने का वादा करती है।

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