कम से कम मर्जी से छोड़ा... समय रैना के शो में बिहारी-कश्मीरी जोक पर छिड़ा सियासी घमासान
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कॉमेडियन समय रैना का शो इंडियाज गॉट लेटेंट 2 एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार शो के दौरान कॉमेडियन शेरोन वर्मा और समय रैना की बातचीत में बिहार और कश्मीरी पंडितों के पलायन को लेकर की गई एक टिप्पणी ने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक तूफान खड़ा कर दिया है।

क्या हुआ था शो में? शो के दौरान समय रैना ने पहले शेरोन वर्मा की भाषा और बिहारी होने को लेकर मजाक किया। इसके जवाब में शेरोन ने समय को स्टोनड कहते हुए कश्मीर में पत्थरबाजी का जिक्र किया। बातचीत आगे बढ़ी तो समय ने शेरोन के मुंबई आने को उनके बिहारी होने का सबूत बताया। इस पर शेरोन ने तपाक से जवाब दिया, कम से कम मैंने अपना स्टेट अपनी मर्जी से छोड़ा है।

क्यों भड़के लोग? शेरोन के इस जवाब को 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनके दर्दनाक पलायन से जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि पलायन जैसी त्रासदी का मजाक उड़ाना बेहद संवेदनशील मामला है। लोग इसे कश्मीरी पंडितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा मान रहे हैं।

नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया इस विवाद पर सियासत भी गरमा गई है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी समुदाय या क्षेत्र का अपमान स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने नागरिकों के बीच भेदभाव न करने की नसीहत दी।

वहीं, कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि कॉमेडी का उद्देश्य हंसाना होना चाहिए, न कि किसी जाति या समुदाय को नीचा दिखाना। शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने भी जिम्मेदारी के साथ कॉमेडी करने की बात कही है। कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधि दिलीप पंडिता ने भी शेरोन के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया है।

कौन हैं शेरोन वर्मा? विवादों में घिरीं शेरोन वर्मा बिहार की एक उभरती हुई कॉमेडियन हैं। उन्होंने इंडियाज गॉट लेटेंट के पहले सीजन से अपनी पहचान बनाई थी। शेरोन अपने ऑब्जर्वेशनल ह्यूमर और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित कॉमेडी के लिए जानी जाती हैं।

आम आदमी पार्टी का बचाव इस पूरे मामले में आप नेता संजय सिंह का रुख थोड़ा उदार रहा। उन्होंने कहा कि कॉमेडियन का मकसद लोगों को हंसाना होता है और इस प्रक्रिया में कभी-कभी उनसे गलतियां हो जाती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी की भावनाओं को आहत करना सही नहीं है।

फिलहाल, इस मुद्दे पर सोशल मीडिया दो गुटों में बंटा हुआ है। जहां कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं एक बड़ा वर्ग इसे बेहद आपत्तिजनक और संवेदनहीन करार दे रहा है।

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