महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक विचलित कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बुनियादी ढांचे की कमी ने एक गर्भवती महिला की जान को खतरे में डाल दिया। रक्षाबंधन के दिन जब पूरा देश त्योहार मना रहा था, तब कोईंदूळ गांव के लोग एक गर्भवती महिला की जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
क्या है पूरा मामला? 26 वर्षीय छाया सुरेश नैताम को अचानक लेबर पेन शुरू हुआ। परिवार ने एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन उफनते नाले और जर्जर सड़कों के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। स्थिति गंभीर थी, इसलिए ग्रामीणों ने धैर्य नहीं खोया और खुद मोर्चा संभाल लिया।
खाट बनी सहारा, जान जोखिम में डालकर किया नाला पार ग्रामीणों ने छाया को खाट पर लिटाया और कांवड़ की तरह उसे सहारा देकर उफनते नाले के बीच से ले गए। यह दृश्य बेहद डरावना था, जहां पानी का तेज बहाव और फिसलन भरे रास्ते किसी भी अनहोनी को अंजाम दे सकते थे। नाले के दूसरी ओर एक एम्बुलेंस तैनात थी, जहां सुरक्षित पहुंचने के बाद महिला को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। राहत की बात यह है कि छाया और उनका बच्चा अब सुरक्षित हैं।
आजादी के 75 साल बाद भी पुल का इंतजार यह कोई पहली बार नहीं है जब ग्रामीणों को इस तरह के जानलेवा सफर से गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मानसून में उनका गांव बाकी दुनिया से कट जाता है। बार-बार प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद आज तक यहां पक्का पुल नहीं बन सका है।
बुनियादी सुविधाओं पर सवाल लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक दूरस्थ इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को अपनी जान की बाजी लगाकर अस्पताल पहुंचना पड़ेगा? क्या सरकारें सिर्फ कागजों पर ही विकास का दावा करेंगी? रक्षाबंधन के दिन हुई इस घटना ने साबित कर दिया है कि सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच, जमीनी हकीकत आज भी कितनी भयावह है।
देशभर में एक जैसी स्थिति यह कोई इकलौता मामला नहीं है। कुछ हफ्ते पहले तेलंगाना से भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी, जहां एक सात महीने की गर्भवती महिला को स्ट्रेचर पर नाला पार कराया गया था। इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि देश के सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं और कनेक्टिविटी आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
*रक्षाबंधनाच्या दिवशी ‘लाडक्या बहिणी’चीच फरफट; एटापल्लीतील कोईंदूळमध्ये गर्भवतीला भर पुरातून स्ट्रेचरवरून न्यावे लागले.नदीवर पूल नसल्याने रुग्णवाहिका गावापर्यंत पोहोचू शकली नाही, ग्रामस्थांनी जीव धोक्यात घालून तिला नदीपार नेले.
— Sumit Pakalwar (@PakalwarSumit) August 28, 2026
सुदैवाने छाया नैताम यांची प्रकृती सध्या स्थिर आहे...! pic.twitter.com/nFrxN7gxpe
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