नेपाल में तबाही का मंजर: भारत बना फर्स्ट रिस्पॉन्डर , भेजी 62 टन राहत सामग्री
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नेपाल में बुधवार (26 अगस्त) को आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के बाद भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सबसे पहले पड़ोसी देश का हाथ थामा है। आपदा के तुरंत बाद भारत ने नेपाल को 62 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजकर अपनी फर्स्ट रिस्पॉन्डर (सबसे पहले मदद करने वाले) की वैश्विक पहचान को एक बार फिर पुख्ता किया है।

पीएम मोदी ने की नेपाल के पीएम से बात आपदा की सूचना मिलते ही भारत ने त्वरित कार्रवाई की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं। पीएम ने स्पष्ट किया कि भारत हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय बचाव दल नेपाल की स्थानीय टीमों के साथ तालमेल बिठाकर राहत कार्यों में जुटे हैं।

तीन एयरलिफ्ट से पहुंचाई मदद शुक्रवार शाम तक भारत ने तीन विमानों के जरिए कुल 62 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई। इनमें भारतीय वायुसेना के C-130J और C-17 जैसे आधुनिक विमान शामिल थे।

इसके अलावा, भारत ने एक विशेषज्ञ 11-सदस्यीय मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल भेजी है, जो बचाव कार्यों में तकनीक और डॉक्टरों की मदद कर रही है।

चीन ने भी दिया मदद का भरोसा नेपाल की इस त्रासदी में चीन भी मदद के लिए आगे आया है। चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने नेपाल को इमरजेंसी सप्लाई और नकद मदद देने का वादा किया है। हालांकि, चीन की ओर से सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और रसद पहुंचाने के तरीकों पर काम चल रहा है।

आर्थिक मोर्चे पर नेपाल की तैयारी नेपाल सरकार ने आपदा राहत के लिए 229 मिलियन डॉलर तक की राशि जुटाने की योजना बनाई है। इसमें प्रधानमंत्री राहत कोष के साथ-साथ वर्ल्ड बैंक ने भी 164 मिलियन डॉलर की इमरजेंसी आर्थिक मदद देने का संकेत दिया है। नेपाल ने अपनी नीतिगत बाधाओं को दरकिनार करते हुए अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्वीकार करना शुरू कर दिया है, ताकि बचाव कार्यों को गति दी जा सके।

वैश्विक स्तर पर भारत की साख तुर्की-सीरिया भूकंप हो या म्यांमार, श्रीलंका और वेनेजुएला में आई प्राकृतिक आपदाएं—भारत ने हमेशा संकट के समय सबसे पहले आगे बढ़कर मदद पहुंचाई है। नेपाल मामले में भी अन्य बड़ी वैश्विक शक्तियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तुलना में भारत ने जिस गति से प्रतिक्रिया दी है, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ दुख की घड़ी में चट्टान की तरह खड़ा रहता है।

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