साम्राज्य से किराये के घर तक: सुभाष चंद्रा की दास्तां, बोले- फिर उठ खड़ा होऊंगा
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कभी देश के दिग्गज कारोबारी घरानों में शुमार रहे जी एंटरटेनमेंट के संस्थापक सुभाष चंद्रा इन दिनों एक अलग ही दौर से गुजर रहे हैं। एनसीएलटी (NCLT) की कार्यवाही और वित्तीय संकट के बीच चंद्रा ने एक वीडियो संदेश में अपनी वर्तमान स्थिति पर खुलकर बात की है।

किराए के पैसे से चल रहा खर्च सुभाष चंद्रा ने बताया कि आज उनके पास एक छोटा सा घर है, जिसका आधा हिस्सा उन्होंने किराए पर दे रखा है। इसी किराए से मिलने वाली रकम से वे अपने रोजमर्रा के खर्च पूरे कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि उन्हें इस स्थिति पर कोई पछतावा नहीं है। चंद्रा के अनुसार, उनके पास अब केवल 6.5 करोड़ रुपये बचे हैं, जिसका उपयोग एनसीएलटी की योजना के तहत देनदारियों को चुकाने में किया जाएगा।

45 हजार करोड़ का कर्ज और हकीकत अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए चंद्रा ने दावा किया कि उनके ग्रुप ने कुल 45,000 करोड़ रुपये उधार लिए थे, जिसमें से 43,000 करोड़ रुपये पहले ही चुकाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 3,900 करोड़ रुपये के दावों में करीब 2,000 करोड़ रुपये उन कर्जदाताओं से जुड़े हैं, जिन्होंने उनकी व्यक्तिगत गारंटी का इस्तेमाल ही नहीं किया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 620 करोड़ रुपये का निपटारा हो चुका है और 1,100 करोड़ रुपये का ऑफर अभी भी प्रक्रिया में है।

मेरी नेटवर्थ 45 हजार करोड़ कभी थी ही नहीं चंद्रा ने उन खबरों को मिथक बताया जिनमें उनकी निजी संपत्ति को 45,000 करोड़ रुपये बताया जाता रहा है। उन्होंने 2016 में राज्यसभा चुनाव के दौरान दाखिल अपने संपत्ति घोषणा पत्र का हवाला देते हुए कहा कि तब उनकी नेटवर्थ मात्र 39 करोड़ रुपये थी। उन्होंने तर्क दिया कि एक साल में संपत्ति का इतनी तेजी से बढ़ना असंभव था; लोगों ने ग्रुप के मार्केट कैप को उनकी निजी संपत्ति समझ लिया।

वापसी की तैयारी आर्थिक संकट के बावजूद सुभाष चंद्रा का हौसला टूटा नहीं है। उन्होंने कहा, मैं अभी हारा नहीं हूं, मैं फिर कमाऊंगा। चंद्रा ने बताया कि वे जल्द ही स्विट्जरलैंड में अपने एक मित्र से मुलाकात करेंगे और भारत व अन्य देशों में नए निवेश के अवसरों पर चर्चा करेंगे। भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे अपने परिवार से कुछ पूंजी लेकर नए स्टार्टअप शुरू करेंगे। चंद्रा ने दोहराया कि वे एक पायनियर हैं और जानते हैं कि दोबारा शून्य से शिखर तक कैसे पहुंचना है।

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