बोल मैं शेर हूं : E-20 पेट्रोल पर केजरीवाल का पीएम मोदी पर तंज, चुटकुले के जरिए साधा निशाना
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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E-20 पेट्रोल नीति को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में इस नीति को जबरन थोपा गया निर्णय करार दिया है।

चुटकुले के जरिए कसा तंज

अपनी बात को धार देने के लिए केजरीवाल ने एक काल्पनिक चुटकुले का सहारा लिया। उन्होंने बताया कि कैसे एक प्रतियोगिता में अमेरिकी और रूसी सुरक्षा एजेंसियां शेर ढूंढ लाती हैं, लेकिन मोदी सरकार की पुलिस एक कुत्ते को पकड़कर उसे जबरन शेर कहलवाने के लिए मजबूर करती है।

इस उदाहरण के जरिए केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार लोगों पर E-20 पेट्रोल को जबरन थोप रही है और जो भी इसके खिलाफ आवाज उठाता है, उसे दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

140 करोड़ लोगों को कब तक डराओगे?

केजरीवाल ने सीधे तौर पर पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा, देश के 140 करोड़ लोगों को मारा-पीटा जा रहा है और कहा जा रहा है कि बोलो E-20 सही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचनाओं को सुनने के बजाय सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करवाकर, वीडियो डिलीट करवाकर और एफआईआर दर्ज कराकर असहमति की आवाजों को कुचल रही है।

E-20 पर बड़े खुलासे का दावा

केजरीवाल ने इस नीति के पीछे अमेरिका का दबाव और व्यावसायिक हित होने का दावा किया है। उनके अनुसार, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक है और अपनी खपत पूरी न होने के कारण भारत जैसे बड़े बाजारों को अपना डंपिंग ग्राउंड बना रहा है।

केजरीवाल का दावा है कि पिछले वर्ष भारत ने अमेरिका से करीब एक अरब लीटर एथेनॉल आयात किया था, जो इस साल बढ़कर पांच अरब लीटर तक पहुंच सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना तकनीकी बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किए और पुराने वाहनों की चिंता किए बिना इसे जल्दबाजी में लागू किया है।

बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर सवाल

आप नेता ने सवाल उठाया कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं जो E-20 ईंधन के लिए नहीं बने हैं। उनका तर्क है कि बिना तकनीकी तैयारियों और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए इस नीति को लागू करना वाहन मालिकों के लिए आर्थिक और तकनीकी मुसीबत का सबब बनेगा। केजरीवाल ने सरकार से इस नीति पर पारदर्शी चर्चा करने और जनता के सवालों के जवाब देने की मांग की है।

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